जरुरी जानकारी | अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक सकारात्मक हो जायेगी आर्थिक वृद्धि दर: ईएसीपीएम सदस्य

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसीपीएम) के अंशकालिक सदस्य निलेश शाह ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2021 की मार्च या जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि सकारात्मक दायरे में आ जायेगी, लेकिन इस दौरान भारत को सुधारों को आगे बढ़ाते हुये मौजूदा संकट को अवसर में बदलना होगा।

मुंबई, दो सितंबर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसीपीएम) के अंशकालिक सदस्य निलेश शाह ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2021 की मार्च या जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि सकारात्मक दायरे में आ जायेगी, लेकिन इस दौरान भारत को सुधारों को आगे बढ़ाते हुये मौजूदा संकट को अवसर में बदलना होगा।

शाह ने यह भी कहा कि शेयर बाजारों में तेजी के पीछे का कारण भविष्य को लेकर बंधी बेहतर उम्मीद है, निवेशक पीछे के आंकड़ों पर गौर नहीं कर रहे।

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उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस संकट के बीच देश की जीडीपी में सालाना आधार पर जून 2020 को समाप्त तिमाही में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आयी है।

पेशेवरों के नेटवर्किंग मंच लिंक्ड इन के वेबिनार (इंटरनेटके जरिये आयोजित कार्यक्रम) में कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक शाह ने कहा, ‘‘मौजूदा स्तर पर मार्च 2021 या जून 2021 में समाप्त तिमाही में सालाना आधार पर जीडीपी में वृद्धि हासिल होने की उम्मीद है।’’

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उन्होंने संकेत दिया कि कोविड-19 महामारी का जीडीपी पर दो साल तक असर रहेगा लेकिन इस बात पर जोर दिया कि हमें चुनौतीपूर्ण स्थिति का लाभ उठाने की जरूरत है। जैसा कि हमने 1991 में विदेशी मुद्रा संकट के दौरान किया और उन कदमों से वृद्धि को एक नई गति मिली।

शाह ने कहा कि कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं और भारत को उनका दिल से स्वागत करना चाहिए तथा लाल फीताशाही व्यवस्था समाप्त करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘लॉजिस्टिक’ की ऊंची लागत के कारण भारतीय सामान वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाते। इसे कम करने की जरूरत है। इसके अलावा बिजली की लागत को नीचे लाना है क्योंकि किसानों को सस्ती दर पर बिजली की आपूर्ति से उद्योग के लिये बिजली महंगी (क्रास सब्सिडी के कारण) होती है।

शाह ने पौराणिक कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के संदर्भ में उद्यमी ठीक उसी तरह है जैसा कि महाभारत में अभिमन्यू था। वहीं बाजार ताकतें (मांग और आपूर्ति) कौरव की तरह हैं जबकि पांडव की भूमिका नियमन, बुनियादी ढांचा सुविधा और नीतियां निभा रही हैं।

बाजार में तेजी के बारे में उन्होंने कहा कि बीता हुआ समय ‘लॉकडउाउन’ का है जबकि भविष्य सुधारों का है जो भारत की वृद्धि को नई उड़ान देगा और बाजार उसी नजर से उसे देख रहा है।

शाह ने कहा कि अधिक पूंजी प्रवाह, तेल की कीमतों में नरमी, अच्छा मानसून कुछ कारक हैं जो भविष्य को लेकर उम्मीद जगाते हैं। बाजार उम्मीदों के साथ आगे का समय देख रहा है।

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