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जरुरी जानकारी | सस्ते खाद्यतेलों की भरमार से तिलहन खेती का रकबा फिलहाल कम

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जरुरी जानकारी | सस्ते खाद्यतेलों की भरमार से तिलहन खेती का रकबा फिलहाल कम

नयी दिल्ली, 29 जून देश में सस्ते आयातित खाद्य तेलों की वजह से देशी तेल तिलहन कारोबार की हालत खस्ता बनी हुई है और खरीफ तिलहन फसलों की बुवाई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले अभी तक गिरावट देखने को मिल रही है। बृहस्पतिवार को दिल्ली तेल तिलहन बाजार में कीमतों में मिला जुला रुख बना रहा।

बाजार के जानकार सूत्रों ने बताया कि सरसों में सुधार का रुख है क्योंकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से यह काफी नीचे भाव पर बेचना पड़ रहा है और किसानों की लागत नहीं निकल रही है। इसलिए किसान नीचे भाव पर यथासंभव कम बिकवाली का रास्ता अपना रहे हैं। इस वजह से मंडियों में आवक आज घटकर पौने चार लाख बोरी तक सिमट गयी है जो सरसों तेल तिलहन में सुधार का मुख्य कारण है।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, कल रात शिकागो एक्सचेंज के 3.5 प्रतिशत नीचे बंद होने के बाद सोयाबीन तेल तिलहन में आज गिरावट रही। अभी भी यह मामूली नीचे चल रहा है। मलेशिया एक्सचेंज आज बंद है।

सूत्रों ने कहा कि पिछले साल महाराष्ट्र में 23 जून तक सोयाबीन की बिजाई 83,481 हेक्टेयर में हुई थी जो इस वर्ष 23 जून तक घटकर 806 हेक्टेयर रह गई है। इसी प्रकार पूरे देश में पिछले वर्ष सोयाबीन की बिजाई 1,55,000 हेक्टेयर से घटकर इस बार मात्र 99,000 हेक्टेयर रह गई है। सूरजमुखी का एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाये जाने के बावजूद इसके खेती के रकबे में कमी आने की वजह तलाशनी चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां सस्तेपन का फायदा लेकर सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का अंधाधुंध आयात करने में लगे हैं। कल रात जो खाद्यतेल सोयाबीन की जो खेप विदेशों से लदान के बाद चली उसकी कीमत 1,052 डॉलर प्रति टन थी।

इन्हीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उस तेल को यहां पहुंचने से पहले ही कम कीमत यानी 990 डॉलर प्रति टन के भाव पहले से बेच दिया।

सूत्रों ने कहा कि ऐसी हालत में तो देशी तेल तिलहन उद्योग का बचा खुचा अस्तित्व भी समाप्त हो जायेगा।

उन्होंने कहा कि जो सूरजमुखी तेल का दाम एक समय 2,500 डॉलर प्रति टन था, वह भारी गिरावट के साथ 950 डॉलर प्रति टन रह गया है। क्या सरकार को यह नहीं देखना चाहिये कि इस गिरावट का घरेलू तेल तिलहन कारोबार पर क्या असर हो रहा है और उपभोक्ताओं को यह क्या भाव मिल रहा है ? क्या तेल संगठनों को मौजूदा हालात के बारे में अपनी स्पष्ट राय सरकार के सामने नहीं रखनी चाहिये ?

सूत्रों ने कहा कि मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। जबकि मलेशिया एक्सचेंज के बंद होने के बीच सोयाबीन के साथ साथ पामोलीन तेल कीमतों में भी गिरावट रही। ऊंचे दाम पर मांग कमजोर पड़ने से बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई। जबकि कच्चा पामतेल (सीपीओ) में कोई कामकाज नहीं है।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 4,975-5,075 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,605-6,665 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,530 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,460-2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,660 -1,740 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,660 -1,770 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,950 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,190-5,255 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,955-5,020 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 29, 2023 09:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).