देश की खबरें | दुबे मुठभेड़ पुलिस द्वारा न्यायपालिका की भूमिका को दरकिनार करना दर्शाती है : रिबेरो
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, 20 जुलाई देश के जाने-माने पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी विकास दुबे का मुठभेड़ में मार गिराया जाना पुलिस द्वारा न्यायपालिका की भूमिका को दरकिनार करने जैसा है।

साथ ही इस बात पर जोर दिया कि जांचकर्ताओं को अपराधियों को लेकर ''न्याय'' करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

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नागरिको को संबोधित एक ''खुले पत्र'' में रिबेरो ने कहा कि तमिलनाडु के तूतिकोरिन जिले में पिता-पुत्र की ''हत्या'' परेशान करने वाली थी और इस घटना पर भारत के प्रत्येक पुलिसकर्मी का सिर शर्म से झुकना चाहिए।

वह उस घटना का हवाला दे रहे थे, जिसमें पुलिस के कथित उत्पीड़न के चलते पिता-पुत्र की मौत हो गई थी।

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पुलिस सेवा में रहते हुए महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में तैनात रहे पूर्व अधिकारी ने कहा कि वर्तमान के राजनेता स्वतंत्रता सेनानियों की ''नस्ल'' वाले नहीं हैं, जिन्होंने आजादी के बाद देश में नीति निर्धारण किया।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त रिबेरो ने कहा कि अपराध और अपराधियों से निपटने के दौरान आतंकवाद से लड़ने के असाधारण तरीकों को सामान्य समय में अपनाया नहीं जा सकता है।

उन्होंने कहा, '' गिरोह के सरगना और बड़े आपराधिक गिरोह अस्तित्व में आ पाते हैं क्योंकि वह धन का उपयोग पुलिस अधिकारियों और उनके राजनीतिक आकाओं को घूस देने के लिए करते हैं। यह अपराधियों, पुलिस और राजनीतिज्ञों का एक गठजोड़ है जोकि ऐसे अपराधियों को बनाते हैं।''

रिबेरो ने कहा, '' विकास दुबे की बात करें तो उसका मारा जाना न्यायपालिका की भूमिका को दरकिनार किया जाना है । जांचकर्ताओं को अभियोजन और निर्णय करने की शक्ति नहीं मिलनी चाहिए, जैसा इस समय देश में हो रहा है।''

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