पणजी, 19 अगस्त गोवा सरकार में मंत्री सुभाष फाल देसाई ने शनिवार को महादेई वन्यजीव अभयारण्य तथा आसपास के क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य घोषित करने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान दावा किया कि ‘‘किसी को हमें पर्यावरण संरक्षण की सीख देने कर जरूरत नहीं है।’’
बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने पिछले माह आदेश दिया था कि महादेई वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के इलाकों को बाघ अभयारण्य घोषित किया जाए।
देसाई ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने का फैसला कर लिया है।
बाघ अभयारण्य के मुद्दे पर चर्चा में देसाई ने कहा कि इलाके को बाघ अभयारण्य घोषित करने के बाद उनकी विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 600 लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जंगल में रह रहे लोग पहले ही नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचना से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘‘अब हम और ज्यादा मुश्किलें नहीं सह सकते। अभी इन क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों पर घर बनाने के लिए भी हमें वन अधिकारियों से अनुमति लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ''
मंत्री ने कहा, ''वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में पर्यावरण के प्रति सम्मान उनकी संस्कृति का हिस्सा है। पर्यावरण की रक्षा कैसे करें, किसी को हमें इसकी सीख देने की जरूरत नहीं है।’’
इससे पहले राज्य के वन मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा था कि उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए गोवा सरकार उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी।
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