देश की खबरें | हृदय रोगों की रोकथाम के लिये बेहतर दिनचर्या के प्रति लोगों को जागरूक करें चिकित्सक: राष्ट्रपति

लखनऊ, 11 दिसंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में बढ़ते हृदय रोगों की रोकथाम के लिये दिनचर्या को बेहतर बनाने के सिलसिले में जनजागरूकता फैलाने का आह्वान करते हुए चिकित्सकों से कहा कि वे ऐसा करके हजारों लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने राजधानी लखनऊ स्थित ‘डिवाइन हार्ट फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, ''मैं दिल के देखभाल (हार्ट केयर) से जुड़े सभी चिकित्सकों से यही अनुरोध करती हूं कि वे समाज के जन-जन में सेहतमंद दिल से जुड़ी दिनचर्या के बारे में जागरूकता का प्रसार करें।''

उन्होंने कहा, ''आप जब अस्पताल में इलाज करते हैं तो 100, 200 या 500 लोगों का उपचार करते हैं, लेकिन जब आप जागरूकता के द्वारा रोकथाम करते हैं तो आप सैकड़ों और हजारों लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं। मैं आशा करती हूं कि आप सभी लोग हृदय की बीमारी से बचाव पर विशेष ध्यान देंगे और साथ ही देशवासियों को कम खर्च में अच्छी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएंगे। हम सबको स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण करना है।''

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘डिवाइन हार्ट फाउंडेशन’ के अस्पताल और रिसर्च सेंटर में उन्हें ‘हेल्थ केयर’ विशेष कर ‘हार्ट केयर’ के महत्वपूर्ण विषय से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में ‘नर सेवा नारायण सेवा’ की भावना प्रबल हो वहां मानवता के श्रेष्ठतम रूप का दर्शन होता है।

उन्होंने कहा कि उनको यह बताया गया है कि डिवाइन हार्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना इसी भावना पर आधारित है।

राष्ट्रपति ने लंबे समय तक लखनऊ से सांसद रहे दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को याद करते हुए कहा कि वाजपेई का लखनऊ के निवासियों से गहरा रिश्ता था। लखनऊ के लोगों ने अपने प्रतिनिधि अटल जी के रूप में देश को एक अद्भुत प्रधानमंत्री तथा भारत रत्न प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि अटल जी हमारे महान लोकतंत्र को लखनऊ की अनमोल भेंट हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ''उत्तर प्रदेश की अपनी इस यात्रा के दौरान संयोग से मुझे बनारस की सुबह और लखनऊ की शाम में उपस्थित होने की खुशी हो रही है। लखनऊ की तहजीब और नफासत के किस्से बहुत लोकप्रिय हैं। मुझे लखनऊ आना अच्छा लगता है।''

उन्होंने कहा, ''मेरा जन्म स्थान ओडिशा में है। मुझे हिंदी की बहुत गहरी जानकारी नहीं है, लेकिन मैंने गौर किया है कि यहां के लोग मैं की जगह हम का इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकार अकेला व्यक्ति भी अपने आप को समूहों से जोड़कर देखता है। पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह भावना हमें भारतीय बनाती है। अलग-अलग धर्म, जाति, क्षेत्र और राज्यों तथा आस्था से जुड़े होने के बावजूद हमारी पहचान एक भारतीय की है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)