नयी दिल्ली, 30 सितंबर द्रमुक के राज्यसभा सदस्य तिरूचि शिवा ने किसानों से संबंधित नये कानूनों की संवैधानिक वैधता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। इससे पहले, केरल से कांग्रेस के एक सांसद ने इन कानूनों की वैधता को चुनौती देते हुये न्यायालय में याचिका दायर की थी।
संसद ने हाल ही में संपन्न मानसून सत्र के दौरान किसानों और कृषि से संबंधित तीन विधेयकों को मंजूरी दी थी जिन्हें राष्ट्रपति राम नाथ कोविद की27 सितंबर को संस्तुति मिलने के साथ ही कानून का दर्जा प्राप्त हो गया था। ये कानून 27 सितंबर से देश में लागू हो गये हैं।
ये कानून हैं: कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार , कानून, 2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) कानून, 2020 और आवश्यक वस्तु संशोधन कानून, 2020।
द्रमुक नेता तिरूचि शिवा ने अपनी याचिका में कहा है कि ये नये कानून पहली नजर में ही असंवैधानिक, गैरकानूनी और मनमाने हैं।
उन्होंने दलील दी है कि ये कानून किसान और कृषि विरोधी हैं। याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बनाये गये इन कानूनों का एकमात्र मकसद सत्ता से नजदीकी रखने वाले कुछ कार्पोरेशन को लाभ पहुंचाना है।
याचिका में कहा गया है कि ये कानून कृषि उपज के लिये गुटबंदी और व्यावसायीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा ओर अगर यह लागू रहा है तो यह देश को बर्बाद कर देगा क्योंकि बगैर किसी नियम के ये कार्पोरेट एक ही झटके में हमारी कृषि उपज का निर्यात कर सकते हैं।
इससे पहले, केरल से कांग्रेस के एक सांसद टीएन प्रथपन ने नये किसान कानून के तमाम प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुये न्यायालय में याचिका दायर की थी।
त्रिशूर से सांसद टीएन प्रथपन ने याचिका में आरोप लगाया है कि कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार , कानून, 2020, संविधान के अनुच्छेद 14 (समता) 15 (भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
याचिका में इस कानून को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा गया है कि यह असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य है।
दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि नये कानून में कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है. इसके माध्यम से कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि का कारोबार करने वाली फर्म, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए सशक्त करता है। यही नहीं, यह कानून करार करने वाले किसानों को गुणवत्ता वाले बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करना, तकनीकी सहायता और फसल स्वास्थ्य की निगरानी, ऋण की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा सुनिश्चित करता है।
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