देश की खबरें | द्रमुक सदस्य की विवादास्पद टिप्पणी ने ‘इंडिया’ गठबंधन के ‘वैचारिक विरोधाभास’ को उजागर किया: भाजपा

नयी दिल्ली, 12 दिसंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कहा कि एक दिन पहले राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर विधेयकों पर चर्चा के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के एक सदस्य की विवादास्पद टिप्पणी ने विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन में व्याप्त ‘वैचारिक विरोधाभास और भ्रम’ को एक बार फिर सामने ला दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोमवार को उच्च सदन में विचार और पारित कराने के लिए पेश किए गए दो विधेयकों का विरोध करते हुए द्रमुक सदस्य एम. मोहम्मद अब्दुल्ला ने तर्कवादी और द्रविड़ आंदोलन के संस्थापक पेरियार का हवाला देते हुए अपनी बात का समर्थन किया था और सरकार से जम्मू-कश्मीर में कई मुद्दों के समाधान के लिए कदम उठाने को कहा था।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने द्रमुक सदस्य की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया और सांसदों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ आने वाली जिम्मेदारी की याद दिलाई।

इस मामले पर टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि द्रमुक सदस्य ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन सोमवार की घटना ने ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों के बीच व्याप्त वैचारिक विरोधाभास और भ्रम को प्रकाश में ला दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘अलगाववाद कुछ लोगों के दिमाग में चला गया है। यह एक गंभीर मुद्दा है। इसलिए उन्हें कल सदन में माफी मांगनी पड़ी। कांग्रेस को भी स्पष्टीकरण देना पड़ा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों के बीच कितना वैचारिक विरोधाभास और भ्रम है, यह कल सामने आ गया।’’

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने कहा कि जो लोग देश को तोड़ना चाहते हैं, उनकी आवाज फिर से उठने लगी है।

उन्होंने कहा, ‘‘दो सांसदों ने राज्यसभा में यह कोशिश की। राज्यसभा में उनकी जोरदार निंदा की गई और उनकी (अब्दुल्ला की) टिप्पणी को कार्यवाही से हटा दिया गया।’’

रूढ़ी ने कहा, ‘‘लेकिन इससे ज्यादा खतरनाक ऐसी मानसिकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 अस्थायी था। इसे निरस्त कर दिया गया। उच्चतम न्यायालय का फैसला भी आ चुका है। अब इस पर (अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर) विवाद पैदा करना और इसे पूरे देश से जोड़ना विपक्ष की ओर से एक खतरनाक संकेत है।’’

बहरहाल, द्रमुक शासित तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने कहा कि राज्यसभा में अब्दुल्ला की टिप्पणी से भ्रम पैदा हुआ क्योंकि उन्होंने पेरियार के उद्धरण का गलत अनुवाद किया, जो तमिल में है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जानबूझकर नहीं किया गया।’’

अन्नाद्रमुक के राज्यसभा सदस्य एम. थंबी दुरई से जब इस बारे में टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने कहा, ‘‘गलत अनुवाद के कारण गलत धारणा पैदा हुई।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘पेरियार एक योद्धा थे... वह विशेष रूप से जातिवाद के खिलाफ थे और वह सभी लोगों को समान देखना चाहते थे... वह एक महान सुधारक थे। वह हमारे संस्थापक नेता हैं। अन्नाद्रमुक हमेशा पेरियार की नीति का पालन कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि भाजपा सरकार ने भी पेरियार (सामाजिक न्याय के विचार) को स्वीकार किया है जब वे जम्मू-कश्मीर में आरक्षण प्रदान करने के लिए एक विधेयक लाए हैं। यह पेरियार की जीत है। यही वह चीज है जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी।’’

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