देश की खबरें | अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की हिरासत : केंद्र के अनुरोध पर न्यायालय फिर सुनवाई को राजी

नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की अनिश्चितकालीन हिरासत से जुड़े मामले पर चार मार्च को फिर से सुनवाई करेगा।

शीर्ष अदालत ने यह निर्णय केंद्र सरकार के इस अनुरोध के मद्देनजर लिया कि वह विदेश मंत्रालय से विशिष्ट जानकारी लेने के बाद एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है, क्योंकि इस मामले के व्यापक असर हो सकते हैं।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने दलीलें सुनने के बाद बृहस्पतिवार को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को मामले का जिक्र किया और कहा कि सरकार विदेश मंत्रालय से विशिष्ट जानकारी लेने के बाद एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है, क्योंकि इस मामले के व्यापक असर हो सकते हैं।

इसके बाद पीठ ने कहा, “हम इस तथ्य से वाकिफ हैं कि हमने मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रखा है। हालांकि, मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए हम रजिस्ट्री को इसे चार मार्च को फिर से सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हैं।”

पीठ ने मेहता को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की इजाजत दे दी।

शीर्ष अदालत 2013 में दायर एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे कलकत्ता उच्च न्यायालय से उसे स्थानांतरित किया गया था।

उसने 13 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए इस तथ्य पर निराशा व्यक्त की थी कि अवैध अप्रवासियों को सजा पूरी करने के बाद भी जेलों में कठोर कारावास भुगतना पड़ रहा है।

सर्वोच्च अदालत ने केंद्र से सवाल किया था कि जिन देशों में अवैध प्रवासियों को निर्वासित किया जाना है, उनसे इनकी राष्ट्रीयता का पता लगाने की जरूरत क्यों है, जबकि यह स्पष्ट है कि ये प्रवासी उस देश के नागरिक होते हुए भी अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे।

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