देश की खबरें | पिछली दुर्घटनाओं और जांच आयोग की रिपोर्ट के बावजूद, केरल सरकार ने कुछ नहीं किया: कांग्रेस व भाजपा

मलप्पुरम (केरल), आठ मई कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कहा कि केरल में पिछले 100 वर्षों में कई घातक नौका दुर्घटनाओं और तीन जांच आयोग की रिपोर्ट में निवारक उपायों की सिफारिश के बावजूद, राज्य सरकार के हस्तक्षेप में कमी के कारण यहां नौका विहार त्रासदी हुई, जिसमें 22 लोगों की जान चली गई।

इस दुर्घटना में जीवित बचे और नौका पर सवार नहीं होने वाले लोगों ने बताया कि नौका ऑपरेटर ने सवारी के लिए ‘अंतिम ट्रिप’ का हथकंडा अपनाया, जिसके कारण नौका पर क्षमता से अधिक लोग सवार हो गये। उन लोगों ने बताया कि इतना ही नहीं, नौका के एक ओर झुक जाने को लेकर वहां उपस्थित लोगों की चेतावनी पर भी ध्यान नहीं दिया गया जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।

जीवित बचे लोगों, आसपास खड़े लोगों और स्थानीय निवासियों के बयानों से पता चलता है कि दुर्घटनाग्रस्त नौका मछली पकड़ने वाली एक नाव थी, जिसे मनोरंजक नौका में बदल दिया गया था और इसके पास नौका विहार सेवाओं की पेशकश के लिए लाइसेंस नहीं था, इतना ही नहीं, इसमें ‘लाइफ जैकेट’ जैसे पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की भी कमी थी।

उन्होंने बताया कि यात्रियों को ‘लाइफ जैकेट’ उपलब्ध नहीं कराया गया था और क्षमता से अधिक लोग बैठा दिए गए।

विगत में 2002, 2007 और 2009 में स्थापित जांच आयोगों ने खराब डिजाइन नौकाओं, उनके घटिया रखरखाव, नौवहन संबंधी सहायता का अभाव, क्षमता से अधिक सवारी भरने और चालक दल की लापरवाही को ऐसी दुर्घटनाओं के कारण बताये थे।

वर्ष 2002 में, कुमारकोम नाव त्रासदी के बाद न्यायमूर्ति के नारायण कुरुप जांच आयोग (सीओआई) ने पाया था कि नाव की खराब स्थिति, खराब रखरखाव, ओवरलोडिंग और चालक दल के लापरवाह आचरण दुर्घटना के लिए जिम्मेदार थे। इस दुर्घटना में 29 लोगों की जान चली गई थी।

वर्ष 2007 में थाट्टेक्कड़ नौका दुर्घटना के बाद न्यायमूर्ति एम. एम. परीद पिल्लै आयोग ने पाया था कि ओवरलोडिंग और नौका विहार के असमय घंटे इस त्रासदी के कारण थे।

वर्ष 2009 में ई. मैथीनकुंजू आयोग ने पाया कि ओवरलोडिंग, अनुभवहीन चालक दल आदि थेक्कडी नौका विहार दुर्घटना के अहम कारण थे। गौरतलब है कि केरल पर्यटन विकास निगम की एक डबल डेकर नाव थेक्कडी के झील में पलट जाने से 45 पर्यटकों की जान चली गई थी।

वर्ष 2013 की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट भी बताती है कि राज्य सरकार ने इन समितियों की किसी भी सिफारिश पर ध्यान नहीं दिया है।

स्थानीय निवासियों और जीवित बच निकले लोगों तथा कांग्रेस एवं भाजपा के अनुसार, इन सभी सिफारिशों के उल्लंघन के कारण रविवार शाम नाव दुर्घटना हुई।

विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन ने दुर्घटनास्थल और हादसे में मारे गए लोगों के घरों का दौरा किया और इसे 'मानव निर्मित आपदा' करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि थेक्कडी और थाट्टेक्कड़ नौका विहार त्रासदियों के बावजूद, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कोई तंत्र नहीं था। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि नौका सेवा गैर-कानूनी तरीके से और बिना लाइसेंस के चल रही थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

सतीशन ने एक बयान में दावा किया कि राज्य में स्थिति ऐसी है जहां हर कोई सोचता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और बच निकल सकते हैं।

भाजपा की ओर से जारी एक बयान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने केरल के पर्यटन मंत्री पी ए मोहम्मद रियास के इस्तीफे की भी मांग की।

भाजपा नेता ने कहा कि अगर रियास को कोई "शर्म" है, तो उन्हें पर्यटन मंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि उनके विभाग को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि इस तरह की नाव एक ऐसे स्थान पर कैसे चल रही है जहां अक्सर पर्यटक आते हैं।

पार्टी के प्रदेश प्रमुख ने कहा कि पर्यटन विभाग केरल पर्यटन के विज्ञापन पर करोड़ों रुपये खर्च करता है।

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