मुंबई, नौ जुलाई देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका से विदेशी छात्रों का निर्वासन दीर्घावधि में कंपनियों के सामने प्रौद्योगिकी विकास को सीमित करने की चुनौती खड़ी करेगा, क्योंकि कंपनियां कुशल और योग्य कर्मियों के लिए इन्हीं विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों पर निर्भर करती हैं।
कंपनी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच1-बी वीजा पर रोक लगाने के कदम को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित’ करार दिया। उल्लेखनीय है कि प्रौद्योगिकी कंपनियां इस वीजा का उपयोग बड़े पैमाने पर करती हैं।
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अमेरिकी सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किये हैं जो कि उन विदेशी छात्रों को अमेरिका में रहने से रोकते हैं जिनके विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान आगामी सत्र में सिर्फ ऑनलाइन कक्षायें लेने का नियम तय कर चुके हैं। इस नियम ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने अमेरिका के गृह मंत्रालय और आव्रजन मंत्रालय पर मुकदमा दायर करने के लिए प्रेरित किया।
टीसीएस के वैश्विक मानव संसाधन विभाग प्रमुख मिलिंद लक्कड़ ने कहा कि भविष्य में हमें देखना होगा कि हालात कैसे बदलते हैं। लेकिन लंबी अवधि में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और चिकित्सा (स्टेम) क्षेत्र में योग्य उम्मीदवारों को लाने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों में अच्छी खासी संख्या अंतरराष्ट्रीय छात्रों की होती है।
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उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ कंपनियों के सामने चुनौती खड़ी नहीं होगी, बल्कि यह अमेरिका में प्रौद्योगिकी विकास को भी बाधित करेगा।
उन्होंने कहा कि एक सहयोगी के नजरिए से भी देखा जाए तो इस तरह का नियमन ‘अनुचित’ होगा।
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