विदेश की खबरें | प्रदर्शनों ने दुनियाभर में फैले नस्लवाद को उजागर किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस की वजह से संभावित स्वास्थ्य खतरे के बावजूद उन्होंने मार्च किया और नारे लगाए।

कोरोना वायरस की वजह से संभावित स्वास्थ्य खतरे के बावजूद उन्होंने मार्च किया और नारे लगाए।

प्रदर्शनकारियों ने मिनियापोलीस में जॉर्ज फ्लॉयड की स्तब्ध करने वाली हत्या के खिलाफ पूरे अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों के प्रति न केवल एकजुटता प्रकट की, बल्कि अपने देशों में भी असमानता को उजागर किया।

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उल्लेखनीय है कि 25 मई को हथकड़ियों में जकड़े फ्लॉयड की मौत उस समय हो गई जब पुलिसकर्मी ने उसके गले को घुटने से दबा दिया। फ्लॉयड के आखिरी शब्द थे ‘‘मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं।’’

ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोगों ने आदिवासियों के साथ सदियों से हो रहे दुर्व्यवहार को रेखांकित किया। खासतौर से 2015 में पांच पुलिसकर्मियों की प्रताड़ना से 2015 में जेल के अस्पताल में हुई डेविड डुंगले की मौत।

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प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्ती थी, ‘‘वही कहानी, पर दूसरी जगह।’’

कई प्रदर्शनकारियों ने फ्लॉयड के साथ हुई घटना की तुलना ब्रिटिश पुलिस और प्रशासन को लेकर अपने अनुभवों से की।

उल्लेखनीय है कि 16वीं और 17वीं सदी में कई ब्रिटिश बंदरगाह शहर अमेरिका को गुलामों की बिक्री से अमीर हो गए थे। रविवार को दक्षिण पश्चिमी इंग्लैंड के ब्रिस्टोल में प्रदर्शनकारियों ने गुलामों का व्यापार करने वाले व्यापारी की प्रतिमा तोड़ दी। इस व्यापारी की कपंनी शुरुआत में गुलामों के सीने पर कंपनी के पहले अक्षर को ब्रांड के तौर पर गोद देती थी।

पिछले दशक में ब्रिटिश सरकार ने उन ब्रिटिश कैरिबियाई नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा की योजना से बाहर कर दिया था जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन के पुर्निर्माण के लिए आए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा सभी को मुहैया कराए जाने के बावजूद गत कुछ महीनों में ब्रिटेन के अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के श्वेत लोगों के मुकाबले कोरोना वायरस से मौत का अधिक खतरा है।

लंदन में अश्वेत 37 वर्षीय एंड्रयू फ्रांसिस ने कहा, ‘‘ नस्लीय भेदभाव की वजह से लोगों में भारी निराशा है। हम अपने बच्चों और उनके बच्चों के लिए बदलाव चाहते हैं एवं ब्रिटेन, अमेरिका और पूरी दुनिया में समानता लाने में सफल होंगे।’’

पूरे फ्रांस में लोगों ने कोरोना वायरस की महामारी के मद्देनजर प्रदर्शन पर लगाई गई रोक की अवज्ञा करते हुए अपनी चिंताओं को प्रकट किया।

पेरिस में शनिवार को मेरी जेद्जे भीड़भाड़ वाला इलाका रहा। जेदजे का जन्मदिन 14 जुलाई को होता है। इसी दिन को 1789 में पेरिस स्थित बस्तियों को लोगों ने तोड़ दिया था और फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत हुई थी। फ्रांस में इस दिन को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

फ्रांस की क्रांति में लोगों ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की मांग की थी और ये शब्द फ्रांस के स्कूलों और टाउन हॉल में अंकित हैं, लेकिन रंग की वजह से फ्रांस में दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह व्यवहार का सामना कर रहे लोगों को यह खोखला लगता है।

मैरी ने कहा, ‘‘ मैं जन्म से फ्रांसीसी हूं और अपने देश का जश्न मनाता हूं लेकिन दैनिक आधार पर, मैं नहीं महसूस करती कि यह देश मुझे स्वीकार करता है।’’ उनके हाथ में तख्ती थी जिसपर लिखा था ‘काला होना अपराध नहीं है।’

दुनियाभर में प्रदर्शनों में शामिल हो रहे लोगों की कहानी अलग-अलग है, लेकिन संदेश एक ही है।

रोम में पढ़ने आए घाना के 26 वर्षीय अब्दुल नसीर ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है, आप जानते हैं कि इस 21वीं सदी में लोगों के रंग को लेकर ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वे कुष्ठ रोगी हों।

उन्होंने यह बात इटली की राजधानी में रविवार को प्रदर्शन के दौरान कही।

प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई कि इस महामारी के बीच जब दुनिया के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में भारी उलटफेर हुआ है तो नेता और सरकार समाज के सभी धड़े न्याय युक्त और समान विश्व का निर्माण करेंगे।

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