जरुरी जानकारी | आटा मिलों के संगठन की सरकार से गेहूं बोर्ड के गठन की मांग

गोवा, तीन मार्च आटा मिलों के संगठन आरएफएमएफआई ने सोमवार को सरकार से शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा नीति मार्गदर्शन और बाजार विस्तार के अवसर प्रदान करने के लिए गेहूं बोर्ड स्थापित करने की मांग की।

यहां एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए रोलर्स फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएमएफआई) के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने कहा, ‘‘हमारा उद्योग महज एक आर्थिक क्षेत्र नहीं है, यह खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ है, रोजगार में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक आवश्यक शक्ति है।’’

उन्होंने कहा कि इस उद्योग की क्षमता को खोलने और बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिए एक स्थिर और अनुमानित गेहूं नीति होनी चाहिए।

वह निर्यात-आयात, बफर स्टॉक प्रबंधन और मुक्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) से संबंधित नीतियों का जिक्र कर रहे थे।

चितलांगिया ने इस महत्वपूर्ण फसल से संबंधित संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास और सभी अंशधारकों के लाभ के लिए एक समर्पित गेहूं बोर्ड की भी वकालत की।

उन्होंने कहा, ‘‘मसाला बोर्ड और चाय बोर्ड की तर्ज पर, एक समर्पित गेहूं बोर्ड आवश्यक शोध, नीति मार्गदर्शन और बाजार विस्तार के अवसर प्रदान करेगा।’’

फेडरेशन के अध्यक्ष ने सरकार से खरीद सत्र के बाद गेहूं पर आयात शुल्क की समीक्षा करने का भी आग्रह किया, जो जून में समाप्त होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘आयात शुल्क 40 प्रतिशत से अधिक होने के कारण गेहूं का आयात वर्तमान में व्यावहारिक नहीं है। संतुलित मांग-आपूर्ति समीकरण बनाए रखने के लिए वास्तविक फसल के आंकड़ों के आधार पर खरीद सत्र के बाद पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।’’

गेहूं रबी (सर्दियों में बोई जाने वाली) मौसम में उगाया जाता है। इस महीने के अंत से कटाई शुरू हो जाएगी।

भारत ने फसल वर्ष 2023-24 (जुलाई-जून) में 1,132 लाख (11.32 करोड़) टन गेहूं का उत्पादन किया।

कंपनी अधिनियम के तहत वर्ष 1940 में स्थापित आरएफएमएफआई आटा मिलिंग उद्योग के हितों का प्रतिनिधित्व करता है।

दो दिवसीय सम्मेलन 'मिलिंग का भविष्य - दृष्टिकोण 2030 और उसके बाद’ में भारत और विदेश से 600 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन में आटा मिल उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इनमें खाद्य सुरक्षा और जलवायु सहिष्णुता, नीति एवं बुनियादी ढांचे का विकास, गेहूं भंडारण और लॉजिस्टिक्स में वैश्विक सर्वोत्तम व्यवहार, मिलिंग में प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेषण, मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार और आटा मिलिंग में डिजिटल बदलाव शामिल है।

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