नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी और पुलिस को निर्देश दिया कि अगर वह उसे गिरफ्तार करना चाहती है तो उसे एक हफ्ते का नोटिस दे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि दर्शन सिंह घटना की कथित वीडियो में नहीं दिख रहे हैं और खजूरी खास इलाके में एक दुकान में दंगा, लूट और जलाने के मामले में किसी स्वतंत्र गवाह ने भी उसकी पहचान नहीं की है।
अदालत ने कहा कि दंगो से पहले शिकायतकर्ता याकूब और सिंह के बीच बिजली के बिल की अदायगी को लेकर विवाद और कलह था। सिंह के पिता की स्वामित्व वाली दुकान में याकूब किरायेदार थे।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, “ आवेदक दिल्ली के करावल नगर का स्थायी निवासी है। वह पहले किसी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। अभियोजन के मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना, मेरा विचार है कि आवेदक इस मामले में इस अदालत से राहत का हकदार है।“
अदालत ने कहा कि वह जांच में शामिल हुआ है और न्याय के हित में रहेगा कि वह जांच में शामिल होता रहे।
अदालत ने कहा कि आवेदक सिंह जांच में सहयोग करेंगे और जब भी जांच अधिकारी पूछताछ के लिए बुलाएं तो वह हाजिर हों।
न्यायाधीश ने कहा कि जांच अधिकारी अगर आवेदक को गिरफ्तार करना चाहते हैं तो उन्हें आवेदक को एक हफ्ते का स्पष्ट नोटिस देना होगा ताकि वह कानून के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर सकें।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई में सिंह की ओर से पेश हुए वकील आर के कोचर ने आरोप लगाया कि सिंह परिस्थितियों के पीड़ित हैं और उन्हें पुलिस एवं शिकायतकर्ता ने सांठगांठ करके फंसाया है ताकि सिंह के पिता से रुपये ऐंठ सकें।
गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गई थी जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और करीब 200 लोग जख्मी हुए थे।
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