नयी दिल्ली, 13 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहलवानों बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादियान की उस याचिका पर बुधवार को केंद्र और डब्ल्यूएफआई से जवाब मांगा जिसमें अनुरोध किया गया है कि महासंघ के मामलों का प्रबंधन आईओए-तदर्थ समिति या उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा किया जाये।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने पहलवानों बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादियान की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें डब्ल्यूएफआई के मौजूदा प्रबंधन को चयन ‘ट्रायल’ आयोजित करने की दिशा में कोई भी कदम उठाने से रोकने का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने केंद्र और डब्ल्यूएफआई को दो सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने मामले को 12 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएफआई का संचालन एक ‘‘प्रॉक्सी’’ अध्यक्ष द्वारा किया रहा है और चयन ‘ट्रायल’ पहलवानों की कीमत पर आयोजित किए जा रहे हैं तथा यह आईओए-तदर्थ समिति द्वारा महासंघ का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के मुद्दे पर अदालत के फैसले का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता पिछले साल जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में सबसे आगे थे। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने सात महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के लिए डब्ल्यूएफआई के निवर्तमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग की थी।
इक्कीस दिसंबर, 2023 को हुए चुनाव में बृजभूषण के विश्वासपात्र संजय सिंह को डब्ल्यूएफआई का नया अध्यक्ष चुना गया था।
केंद्र ने 24 दिसंबर, 2023 को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को निलंबित कर दिया था क्योंकि नवनिर्वाचित संस्था ने उचित प्रकिया का कथित तौर पर पालन नहीं किया था।
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