देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने यमुना के पास से अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया

नयी दिल्ली, 11 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष को यमुना नदी के तट, नदी तल और नदी में बहने वाले नालों पर से सभी अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने के कार्य के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा वन विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए डीडीए उपाध्यक्ष को नोडल अधिकारी नियुक्त किया तथा उनसे एक सप्ताह के भीतर सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाने को कहा।

अदालत ने शाहीन बाग के पास यमुना नदी के तट पर कुछ अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए आठ जुलाई को यह आदेश पारित किया था।

पीठ ने आदेश दिया, "याचिकाकर्ताओं की मांग को ध्यान में रखते हुए यह न्यायालय डीडीए के उपाध्यक्ष को यमुना नदी के तट, नदी तल और यमुना नदी में बहकर आने वाले नालों पर से सभी अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश देता है।"

पीठ में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भी शामिल थे।

अदालत ने डीडीए उपाध्यक्ष को छह सप्ताह के भीतर संबंधित कार्य की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पारिस्थितिकी दृष्टि से नाजुक यमुना के खादर क्षेत्र को खतरे में डालने और प्रदूषण फैलाने के अलावा नदी के निकट अनियमित निर्माण से मानसून के दौरान लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ रहा है।

प्राधिकारियों के वकील ने स्वीकार किया कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक होने के कारण नदी का खादर क्षेत्र एक निषिद्ध गतिविधि क्षेत्र है और वहां किसी भी अतिक्रमण से पानी का रुख बदल जाता है जिससे आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है।

दिल्ली पुलिस और सरकार के वकील ने कहा कि यमुना नदी के तट पर अवैध और अनधिकृत निर्माण के संबंध में कई अभ्यावेदन उचित कार्रवाई के लिए डीडीए और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को भेजे गए हैं।

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