देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने दृष्टि बाधित छात्रों की याचिका पर रिपोर्ट के लिए सरकार को ‘आखिरी मौका’ दिया

नयी दिल्ली, चार फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने कई दृष्टिबाधित छात्रों की शैक्षिक गतिविधियों के दौरान आवास के अनुरोध वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मंगलवार को आखिरी मौका दिया।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग को वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई।

अदालत ने कहा, ‘‘चार सप्ताह के भीतर वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया जाता है। यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि उक्त अवधि में वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है, तो मामले का फैसला रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर किया जाएगा।’’

मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल के लिए तय कर दी गई।

पांच याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने लाजपत नगर स्थित ‘इंस्टिट्यूशन फॉर द ब्लाइंड’ से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और एक छात्रावास में रहे तथा इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया।

याचिका में कहा गया है कि स्कूली शिक्षा समाप्त होने के बाद उनसे संस्थान के छात्रावास से निकलने के लिए कहा गया था।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता राहुल बजाज और अमर जैन ने कहा कि इन लोगों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग का दायित्व है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्रों या विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विभाग की ओर से कोई छात्रावास सुविधा नहीं है।

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