नयी दिल्ली, छह जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेन्नई की एक तमिल की पत्रिका के संपादक एस. गुरुमूर्ति द्वारा एक न्यायाधीश के विरूद्ध ट्वीट करने के जुड़े 2018 के अवमानना के मामले को बंद करने पर बृहस्पतिवार को सहमति जतायी है।
वकीलों के एक संस्था ने गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना का यह मुकदमा दायर किया था।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति गौरांग कंठ की पीठ ने कहा कि ट्वीट को लेकर गुरुमूर्ति पहले ही पश्चाताप व्यक्त कर चुके हैं।
इसइपर संज्ञान लेते हुए कि मामला पांच साल से लंबित है अदालत ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती कि हर समय व्यक्ति के सिर पर तलवार लटकी रहे।
मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख तय करते हुए अदालत ने ध्यान दिलाया कि मामले में कई अन्य मुद्दे भी हैं और याचिकाकर्ता ‘दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन’ के वकील से कहा कि वह पता करें कि क्या वह अभी भी गुरुमूर्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘अवमानना का यह मामला 2018 से लंबित है... हमारे विचार में वह उपस्थित होकर पश्चाताप कर चुके हैं। कभी-कभी शांत हो जाना भी महत्वपूर्ण होता है। हमें नहीं पता है कि डीएचसीबीए इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है। (संबंधित) पीठ ने इसकी सुनवाई की है कि वह अवमानना है या नहीं और कहा है कि वे (मुकदमा को) आगे नहीं बढ़ाना चाहते।’’
पीठ ने कहा, ‘‘कभी ना कभी तो इसे खत्म करना ही होगा। जब कोई तीसरा पक्ष/व्यक्ति अवमानना का मुकदमा दायर करता है तो कई दिक्कतें होती हैं। यह स्वत:संज्ञान पर नहीं है। आपको कानून अधिकारी, महाधिवक्ता से निर्देश लेना पड़ता है।’’
अदालत ने यह भी कहा कि जब तक किसी का व्यवहार मनमाना नहीं होता है वह अवमानना का मामला शुरू नहीं कर सकती।
अदालत ने वकील से कहा, ‘‘आप डीएचसीबीए के सचिव से निर्देश प्राप्त करें कि क्या वह अभी भी मुकदमा चलाना चाहते हैं।’’
दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश एस. मुरलीधर के खिलाफ गुरुमूर्ति द्वारा कुछ ट्वीट किये जाने के बाद 2018 में डीएचसीबीए ने अवमानना की याचिका दायर की थी।
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