नयी दिल्ली, 28 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान निर्माण श्रमिकों के लिए घोषित राहत योजना का लाभ सभी पात्र मजदूरों को उपलब्ध हो।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने यह निर्देश चार श्रमिकों द्वारा दायर एक याचिका पर दिया। याचिका में उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली सरकार द्वारा घोषित राहत योजना के तहत उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है।
अदालत ने दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया और 20 मई को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ताओं में से एक ने कहा कि उन्हें और उनके जैसे 200 से अधिक अन्य लोगों को राहत योजना के लाभ नहीं मुहैया कराए गए हैं जबकि वे भवन और अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं।
एक अन्य ने दावा किया कि वह 60 साल की उम्र के होने तक अधिनियम के तहत पंजीकृत थे लेकिन उसके बाद वह पंजीकृत नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने अधिनियम के तहत उपलब्ध पेंशन लाभ की मांग की।
याचिका के अनुसार, उन्हें न तो पेंशन दी गई और न ही राहत योजना का लाभ दिया गया।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन और स्थायी वकील संजय घोष ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि इसी तरह की एक अन्य याचिका पहले ही दायर की जा चुकी है जो एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को उन सभी व्यक्तियों के नाम सरकार को मुहैया कराने को कहा जो अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं लेकिन उन्हें लाभ नहीं प्रदान किए गए तथा जो पात्र होने के बावजूद पेंशन से वंचित हैं।
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