नयी दिल्ली, 15 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक याचिका पर आम आदमी पार्टी की सरकार से जवाब मांगा जिसमें कोविड-19 महामारी को देखते हुए कैदियों का अपने वकीलों से परामर्श करने को रद्द करने के सिलसिले में जारी एक सर्कुलर को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में कैदियों को अपनी पसंद के वकीलों के साथ परामर्श करने और मामलों का मसौदा तैयार करने की अनुमति दी जाए।
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अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए मामले में सुनवाई की अगली तारीख 29 जून तय की है।
याचिकाकर्ता अजित पी. सिंह ने कहा कि दिल्ली के जेल विभाग ने महामारी के कारण 25 मार्च से लेकर अब तक जेलों में कैदियों को अपनी पसंद के वकीलों से परामर्श लेने पर रोक लगा दी है।
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उन्होंने कहा कि जेलों ने यह आवश्यक कर दिया है कि दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जेल परिसर में जाने वाले अधिवक्ताओं से ही कैदी परामर्श लें और मामलों का मसौदा तैयार कराएं।
लव कुमार अग्रवाल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘इस प्रकार से प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन किया है।’’
याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली सरकार के 25 मार्च के सर्कुलर को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया जाए।
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