नयी दिल्ली, 30 अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने कथित रिश्वत मामले में केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों को जमानत देते हुए कहा कि ‘उनका पिछला इतिहास बेदाग’ है और उनके सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।
विशेष न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना की अदालत ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के महानिदेशक (कॉरपोरेट मामले) कार्यालय में संयुक्त निदेशक मंजीत सिंह और मंत्रालय में ही संयुक्त निदेशक पुनीत दुग्गल को 29 अगस्त को राहत दी।
अदालत ने कहा कि उनके निलंबन के बाद इसकी संभावना नहीं है कि वे कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेंगे।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक आलोक इंडस्ट्रीज का मामला मंत्रालय में लंबित था और अपने पक्षे में आदेश प्राप्त करने के लिए सह आरोपी ऋषभ रायजादा ने 28 जुलाई को आरोपी को चार लाख रुपये रिश्वत दी थी। आरोपी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा बिछाए गए जाल में रंगे हाथ पकड़े गए।
न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि आरोपी के दोषी साबित होने के बाद अधिकतम सात साल कैद और जुर्माने की सजा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कथित राशि जाल बिछाकर की गई कार्रवाई के दौरान जब्त की जा चुकी है। न्यायाधीश ने कहा कि प्रासंगिक दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं और गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज करा दी है और उपयोगी सामग्री एकत्रित की जा चुकी है।
अदालत ने कहा कि आरोपी सरकारी कर्मी हैं और उनकी जड़ें समाज में हैं और चूंकि ऐसी कोई सामग्री नहीं है जो संकेत करे कि वे निलंबन के बाद सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकते हैं, इसलिए उनकी जमानत अर्जी मंजूर की जाती है।
सीबीआई ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामले में जांच चल रही है और सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। एजेंसी ने कहा कि मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने हैं।
अदालत ने सीबीआई के तर्कों को अस्वीकार करते हुए दोनों अधिकारियों को एक-एक लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी राशि के मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही उन्हें अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया।
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