जरुरी जानकारी | ‘मालवहन गलियारे में देरी ठेकेदारों , कानून-व्यवस्था,धीमे भूमि अधिग्रहण चलते है’

नयी दिल्ली, 26 अगस्त रेलवे के समर्पित मालवहन गलियारे (डीएफसी) में हो रही देरी पर प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रकट होने के कुछ दिनों के बाद रेलवे ने इसके लिये ठेकेदारों के धीमे काम, कुछ स्थानों पर कानून व व्यवस्था की स्थिति तथा राज्यों के सुस्त भूमि अधिग्रहण को प्रमुख कारण बताया है।

रेलवे ने दो निर्माणाधीन गलियारे के एक आंतरिक विश्लेषण के बाद देरी के कारणों की पहचान की है। अभी पश्चिमी डीएफसी (उत्तर प्रदेश से मुंबई) और पूर्वी डीएफसी (पंजाब के लुधियाना से पश्चिम बंगाल के दनकुनी) पर काम चल रहा है।

यह भी पढ़े | JEE And NEET Exams Guidelines: जेईई मेन (JEE Main) और नीट (NEET) परीक्षा से पहले NAT ने जारी की गाइडलाइन, छात्रों को करना होगा इन नियमों का पालन.

विश्लेषण में पता चला है कि एल्स्ट्रॉम, हिताची, जीएमआर इंफ्रा, टीपीएल-अल्देसा (टाटा प्रोजेक्ट्स इंडिया और स्पेन की अल्देसा का संयुक्त उपक्रम), टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग जैसे बड़े ठेकेदार या तो मजदूर जुटाने में असफल हो रहे हैं या पैसे की कमी से जूझ रहे है या फिर काम में ढिलाई कर रहे हैं।

इन गलियारों को दिसंबर 2021 तक तैयार किया जाना था लेकिन रेलवे ने हाल ही में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण उसे समयसीमा को छह महीने खिसकाकर जून 2022 करना पड़ा है।

यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: इस सरकारी पेंशन स्कीम में आप भी कर सकते है निवेश, बुढ़ापे में नहीं होगी पैसे की किल्लत.

रेलवे के विश्लेषण में पता चला है कि जीएमआर इंफ्रा पिछले पांच साल में सिर्फ 63 प्रतिशत काम ही कर पायी है। कंपनी को कानपुर-दीन दयाल उपाध्याय खंड के लिये 2015 में 5,087 करोड़ रुपये का ठेका मिला था।

इसके अलावा एल्स्टॉम खुर्जा-कानपुर खंड पर बिजली, सिग्नल व दूरसंचार के क्षेत्र में काफी धीमा काम कर रही है। कंपनी को इसके लिये 2015 में 1,497 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। खुर्जा-पीलखानी खंड पर टीपीएल-अल्देसा पर्याप्त श्रम बल नहीं जुटा सकी है।

पश्चिमी डीएफसी के विश्लेषण से पता चला है कि हिताची और टेक्समैको सिग्नल व दूरसंचार का काम धीमा कर रही हैं। इसके अलावा गुजरात सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण में धीमी प्रगति से भी काम प्रभावित हुआ है।

रेलवे के प्रवक्ता डीजे नारायण ने पीटीआई- से कहा, ‘‘अब परियोजना की निगरानी साप्ताहिक आधार पर की जा रही है। एक और बैठक अगले सोमवार को सभी हितधारकों के साथ रेल मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली है। रेलवे सभी की बात सुनेगा। अगर ठेकेदार नाखुश हैं तो हम खुश नहीं हो सकते। हमारी सोच सभी को साथ लेकर चलने की है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)