नयी दिल्ली, आठ जुलाई वाम दलों ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा पाठ्यक्रम से राष्ट्रवाद, नागरिकता और धर्मनिरपेक्षता से संबंधित अध्यायों को हटाए जाने की आलोचना करते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कोरोना महामारी को बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मोदी सरकार महामारी के बहाने भारत की बहुलता, विविधता, लोकतंत्र जैसे भाग उच्च माध्यमिक पाठ्यक्रम से हटा रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह सब आरएसएस के दृष्टकोण को आगे बढ़ाना है। यह हमारे संविधान को नष्ट करने की तरह है। यह अस्वीकार्य है।’’
भाकपा ने एक बयान में दावा किया कि सीबीएसई का कदम ‘आरएसएस के हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करने का प्रयास’ है।
यह भी पढ़े | विदेश मंत्रालय का दावा, कुलभूषण जाधव को पुनर्विचार याचिका नहीं दायर करने के लिए पाकिस्तान ने किया मजबूर.
उसने कहा कि वह इस कदम को वापस लेने की मांग करती है।
गौरतलब है कि सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में अगले साल शामिल होने वाले विद्यार्थियों को धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता, नोटबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में पढ़ने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि इन विषयों से संबंधित अध्यायों को कुछ अन्य अध्यायों के साथ ही पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
कोरोना वायरस संकट के बीच विद्यार्थियों पर पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा नौवीं से 12वीं के लिए 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम को घटाते हुए बुधवार को नया पाठ्यक्रम अधिसूचित किया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY