देश की खबरें | माकपा का आरोप- आशा कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने के लिए अराजक तत्वों ने भड़काया, कांग्रेस का पलटवार

तिरुवनंतपुरम, 24 फरवरी केरल की सत्तारूढ़ माकपा ने सोमवार को आरोप लगाया कि वामपंथी सरकार के खिलाफ राज्य सचिवालय के सामने "कुछ आशा कार्यकर्ताओं" के धरने का नेतृत्व "कुछ अराजक समूहों" द्वारा किया जा रहा है।

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) का एक वर्ग पिछले दो सप्ताह से केरल सचिवालय के बाहर मानदेय और अन्य लाभों में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुखपत्र 'देशाभिमानी' में छपे एक लेख में पार्टी के वरिष्ठ नेता इलामारम करीम ने कहा, "कुछ आशा कार्यकर्ताओं को गुमराह किया गया और उन्हें राज्य सरकार के खिलाफ सचिवालय के सामने विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए प्रेरित किया गया, जिसे एलडीएफ विरोधी मीडिया ने बड़े चाव से उठाया।"

उन्होंने कहा कि यह इडुक्की जिले के मुन्नार में सालों पहले हुए विरोध प्रदर्शन की पुनरावृत्ति है, जहां टाटा टी एस्टेट के श्रमिकों के एक वर्ग को "पोम्बिलई ओरुमई" के बैनर तले संगठित किया गया था।

करीम ने कहा, "उस समय भी मीडिया ने ही आंदोलन को हवा दी थी।"

माकपा ने कहा, "कुछ अराजक समूहों ने अब कुछ आशा कार्यकर्ताओं को गुमराह करके यह विरोध प्रदर्शन शुरू करवा दिया है। चूंकि नारे एलडीएफ सरकार के खिलाफ लगाए गए हैं, इसलिए कांग्रेस नेताओं और कुछ मीडिया संस्थानों ने इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक मकसद से आंदोलन को हवा दे रही है।

करीम के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं का विरोध गैरराजनीतिक नहीं है।

उन्होंने कहा, "हम राजनीतिक नेता भी इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं। वहां प्रदर्शन कर रहे सभी लोग आशा कार्यकर्ता हैं।"

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