यहां तक कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इसका जिक्र तुर्की के अपने समकक्ष रजब तैयप एर्दोआन से बातचीत में किया था और बताया था कि कैसे उनके आसपास मौजूद कई लोगों के संक्रमित होने के बावजूद कोरोना वायरस उन्हें छू नहीं पाया।
हालांकि, पश्चिमी स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि एंटीबॉडी जांच, जो रूस में बहुत प्रचलित है, कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने या प्रतिरक्षण क्षमता जांचने के लिए भरोसेमंद नहीं है। उनका कहना है कि एंटीबॉडी जांच से केवल पूर्व में हुए संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब तक तय नहीं है कि एंटीबॉडी का क्या स्तर होना चाहिए जो संकेत दे सके कि व्यक्ति वायरस से सुरक्षित है और न ही यह पता चला है कि कब तक ये सुरक्षा प्रदान करते हैं।
अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने कहा कि ऐसी जांच का इस्तेमाल कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने में नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि शरीर में संक्रमण के बाद एंटीबॉडी बनने में एक से तीन सप्ताह का समय लग सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण का पता लगाने के लिए वायरस की अनुवांशिकी सामग्री की जांच पीसीआर जांच कहलाती है या वायरस के प्रोटीन से उसकी उपस्थिति का पता लगाने के लिए एंटीजन जांच की जाती है।
वहीं, रूस में एंटीबॉडी जांच कराकर नतीजे साझा करना आम है। यहां एंटीबॉडी जांच सस्ती है और देशभर में फैली निजी प्रयोगशालाओं में यह उपलब्ध है। माना जा रहा है कि देश में कोविड-19 से होने वाली रोजाना मौतों और संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बावजूद टीकाकरण दर कम होने की यह बड़ी वजह है।
सेंट पीटरबर्ग स्थित यूरोपीय विश्वविद्यालय में महामारी समूह के प्रमुख डॉ.एंटन बारचुक ने कहा, ‘‘मैं कुछ शहरों में गया और आरटीपीसीआर जांच करानी चाही जो संभव नहीं थी लेकिन एंटीबॉडी जांच कही आसान थी।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY