चेन्नई, 27 जून मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक सरकार में मंत्री रहे एस. पी. वेलुमणि के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों पर रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया। वेलुमणि ने ग्रेटर चेन्नई निगम और कोयम्बटूर निगम के ठेके कथित तौर पर अपनी बेनामी कंपनियों को दिये थे और इस तरह राजकोष को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया।
मुख्य न्यायाधीश एम. एन. भंडारी और न्यायमूर्ति एन. माला की प्रथम पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया और ‘सतर्कता तथा भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय’ (डीवीएसी) एवं याचिकाकर्ताओं अरप्पुर इयक्कम तथा आर. एस. भारती (द्रमुक सदस्य) को निर्देश दिया कि प्राथमिकी खारिज करने की मुख्य याचिका के संबंध में जवाबी हलफनामे दाखिल करें।
वेलुमणि की प्रमुख दलील थी कि उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद डीवीएसी के पुलिस अधीक्षक पोन्नी ने प्रारंभिक जांच की थी और पाया था कि दोनों निगमों द्वारा ठेके देने में याचिकाकर्ता की कोई संलिप्तता नहीं थी और आरोप निराधार हैं।
उन्होंने दलील दी कि कथित रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए द्रमुक सरकार के सत्ता में आने के बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकियां दर्ज की गयीं थीं।
उन्होंने कहा कि प्राथमिकियां राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से दाखिल की गयीं और उन्हें प्रताड़ित करने तथा उनकी साफ-सुथरी छवि को खराब करने के लिए राज्य सरकार ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।
मामले में 25 जुलाई तक सुनवाई पर रोक लगा दी गयी है।
वैभव अविनाश
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