नयी दिल्ली, 23 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय और आव्रजन ब्यूरो को निर्देश दिया कि वह अमेरिकी महिला की याचिका को ही उसका प्रतिवेदन माने जिसमें उसने अपने निर्वासन को चुनौती दी है और भारत यात्रा करने के लिए जारी वीजा बहाल करने का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने यह निर्देश देते हुये कहा कि महिला को छह मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे पर उतरने पर निर्वासित किया गया और इस दौरान न तो उसे लिखित में कोई आदेश या रिकॉर्ड दिया गया और न उसे वापस भेजने के बारे में कोई कारण ही बताया गया।
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अदालत ने 22 जून को दिए अपने आदेश में छह हफ्ते में उसके प्रतिवेदन पर फैसला लेने और इस संबंध में आदेश जारी कर इस निर्णय की वजह भी बताने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी महिला ने दावा किया कि उसके पास वर्ष 2026 तक भारत में बहु प्रवेश वीजा है। इसके बावजूद उसे निर्वासित किया गया।
महिला ने कहा कि वह वर्ष 2014 से नियमित रूप से भारत की यात्रा कर रही है, लेकिन जब उसने बिजनेस वीजा के लिए आवेदन किया तो उसे नामंजूर कर दिया गया।
महिला की ओर से उनके वकील ने अदालत को बताया, ‘‘ बिजनेस वीजा का आवेदन खारिज किए जाने के बावजूद बहु प्रवेश पर्यटन वीजा वैध था और भारत में वह आना जारी रहेंगी।’’’
वकील ने बताया कि छह मार्च को कोलकाता हवाई अड्डे पर आने पर उन्हें निर्वासित कर दिया जिसके बाद वह दुबई लौट गई, जहां वह रहती है। उन्होंने बताया कि वह भारत आने को इच्छुक हैं।
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