श्रीनगर, छह नवंबर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय की वह टिप्पणी राजभवनों में पद पर बैठे सभी लोगों (राज्यपालों) पर लागू होती है, जिसमें कहा गया है कि राज्यपालों को थोड़ा आत्मावलोकन की आवश्यकता है और उन्हें पता होना चाहिए कि वे जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं।
अब्दुल्ला ने ‘एक्स’ पर लिखा, “80 और 90 प्रतिशत लोकप्रियता होने के दावे से परे, (ये टिप्पणियां) उन सभी पर लागू होती हैं, जो राजभवनों/निवासों में पद पर बैठे हैं।”
पंजाब सरकार ने विधेयकों को मंजूरी देने में होने वाली देरी को लेकर राज्यपाल के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने उक्त टिप्पणी की।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘राज्यपालों को मामला उच्चतम न्यायालय में आने से पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए। मामला उच्चतम न्यायालय में आने पर राज्यपाल कार्रवाई करें, इस चलन को खत्म करना होगा...राज्यपालों को थोड़ा आत्मावलोकन की आवश्यकता है और उन्हें यह पता होना चाहिए कि वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं।’’
इससे पहले, सितंबर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर आरोप लगाया था कि वह केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने की अपनी ‘अनिच्छा’ को सही ठहराने और इसके ‘बेताज बादशाह’ बने रहने के लिए अलग-अलग सर्वेक्षण गढ़ रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल सिन्हा की उस कथित टिप्पणी पर यह बात कही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि जम्मू-कश्मीर में सर्वेक्षण कराया जाए, तो 80 फीसदी लोग मौजूदा व्यवस्था यानी केंद्रीय शासन के पक्ष में मतदान करेंगे।
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