तिरुवनंतपुरम/चेन्नई, 23 जून कन्नूर विश्वविद्यालय में नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के निजी सचिव की पत्नी प्रिया वर्गीज के पक्ष में आये केरल उच्च न्यायालय के फैसले को राज्य में सत्तारूढ़ दल माकपा द्वारा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के लिए एक झटका बताये जाने के कुछ घंटे बाद उन्होंने कहा कि यह ‘‘अंतिम निर्णय नहीं’’ है।
खान वर्तमान में चेन्नई में है और उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय सुनाने के बाद व्यक्ति के पास उच्चतम न्यायालय का रुख करने का अधिकार होता है।
उन्होंने कहा,‘‘ मैं उसके लिए इंतजार करूंगा। यह अंतिम फैसला नहीं है। उच्चतम न्यायालय का रुख करने का विकल्प मौजूद है।’’ उन्होंने फैसले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
इससे पहले दिन में, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने कहा था कि उनकी (वर्गीज की) नियुक्ति के संबंध में राज्यपाल ने जो रुख अख्तिार किया था, उसके मद्देनजर यह फैसला राज्यपाल के लिये एक झटका है।
गोविंदन ने कहा,‘‘ यह राज्यपाल के लिये एक झटका है। देखिये कि उन्होंने क्या कहा था। यह आपके (मीडिया के) लिये भी एक झटका है। आप भी उस मुद्दे पर बहुत मुखर थे।’’
गौरतलब है कि राज्यपाल ने राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होने के नाते पिछले साल वर्गीज की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी और उनकी नियुक्ति के संबंध में कन्नूर विश्वविद्यालय के कदम के "राजनीतिक" होने का आरोप लगाया था।
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने निर्णय में कहा था कि विश्वविद्यालय में मलयालम सहायक प्रोफेसर के पद के लिए वर्गीज के पास आवश्यक अनुभव है और उस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी पर तदनुसार विचार किया जाए।
यह पूछे जाने पर कि एक मंत्री ने कहा है कि एसएफआई केरल में विश्वविद्यालयों का प्रॉक्टर है, खान ने कहा कि वह मंत्रियों के बयानों पर टिप्पणी नहीं करेंगे। खान ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को बचाना सब की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि शिक्षण संस्थान संरक्षित रहें, उनकी स्वायत्तता सुरक्षित रहे और इसमें सरकार का कोई दखल नहीं हो।’’
केरल के लोक निर्माण मंत्री पी ए मोहम्मद रियास ने बृहस्पतिवार को एसएफआई को प्रॉक्टर बताया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा,उन्होंने कहा, ‘‘बहुत ही।’’
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