नयी दिल्ली, 31 दिसंबर दिल्ली की एक सत्र अदालत ने पत्नी के साथ क्रूरता करने के जुर्म में एक व्यक्ति को मजिस्ट्रेट अदालत से मिली दो साल की कैद की सजा बरकरार रखी।
सत्र अदालत किरोड़ीमल की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसे भारतीय दंड संहिता की धारा 498 (ए) (पति या पति के किसी रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता) के तहत महिला अदालत ने दो साल की कैद की सजा सुनायी थी। सत्र अदालत ने कहा कि व्यक्ति की पत्नी की गवाही पर अविश्वास करने का कोई साक्ष्य नहीं है।
महिला अदालतें खासकर महिलाओं के साथ अपराध के मामलों से निपटने के लिए गठित विशेष अदालतें होती हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमिंदर सिंह ने हाल के अपने आदेश में कहा, ‘‘आरोपों की प्रकृति तथा प्रतिवादी नंबर दो (पत्नी) एवं समाज के साथ अपराध के प्रभाव को ध्यान में रखकर यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि निचली अदालत ने अपीलकर्ता को सजा सुनाकर सही किया है।’’
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमिंदर सिंह ने कहा, ‘‘उस अनुसार, आठ जनवरी, 2019 को सुनायी गयी सजा में किसी दखल की जरूरत नहीं है।’’
सत्र अदालत ने कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार महिला को कई चोट आई थी और मजिस्ट्रेट ने सही कहा था कि उसके साथ उसके पति ने ‘नृशंसतापूर्वक मारपीट’ की थी। नजफगढ़ थाने ने किरोड़ीमल के विरूद्ध उसकी पत्नी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की थी।
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