देश की खबरें | न्यायालय आईएलपी से जुड़ी असम के छात्र संगठनों की याचिकाओं पर दो जून को करेगा सुनवाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय द्वारा असम स्टूडेंट्स यूनियन की दो याचिकाओं पर अब अगले सप्ताह मंगलवार को सुनवाई किये जाने की संभावना है।
नयी दिल्ली, 29 मई उच्चतम न्यायालय द्वारा असम स्टूडेंट्स यूनियन की दो याचिकाओं पर अब अगले सप्ताह मंगलवार को सुनवाई किये जाने की संभावना है।
असम को ‘इनर लाइन परमिट’ (आईएलपी) देने से इनकार करने के उद्देश्य से बंगाल पूर्वी सीमांत नियमन (बीईएफआर), 1873 में संशोधन करने के राष्ट्रपति के आदेश को इन याचिकाओं के जरिये चुनौती दी गई है।
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दोनों छात्र संगठनों ने राज्य को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के प्रभाव से, खासतौर पर बांग्लादेश से आने वालों से संरक्षित रखने के लिये प्रदेश में आईएलपी व्यवस्था की मांग की है।
शीर्ष अदालत द्वारा जारी परिपत्र के मुताबिक ऑल ताई अहोम स्टूडेंट्स यूनियन और असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद की याचिकाएं शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश एस एक बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिये सूचीबद्ध थी। लेकिन अब इन पर दो जून को सुनवाई होगी।
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दोनों संगठनों ने बीईएफआर में संशोधन करने के राष्ट्रपति के 11 दिसंबर 2019 के आदेश को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक बताया है।
ऑल ताई स्टूडेंट्स यूनियन ने अधिवक्ता कौशिक चौधरी के मार्फत दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संशोधन का आदेश संविधान के अनुच्छेद 372 (2) के तहत जारी किया। हालांकि, अनुच्छेद 372 (3) के तहत उन्हें ऐसा करने की शक्ति संविधान लागू होने के बाद से सिर्फ तीन साल (1953 तक) के लिये ही थी।
राज्य के कई छात्र संगठन नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं । ये संगठन राज्य में आईएलपी लागू करने की मांग करते हुए कह रहे हैं कि बीईएफआर के तहत आईएलपी प्रणाली असम के कुछ अविभाजित जिलों में बहुत हद तक व्याप्त है।
राष्ट्रपति ने 11 दिसंबर को एक आदेश पर हस्ताक्षर कर मणिपुर में भी आईएलपी व्यवस्था का विस्तार कर दिया था।
आईएलपी व्यवस्था के तहत आने वाले राज्यों में जाने के लिये देश के अन्य राज्यों के लोगों को इजाजत लेने की जरूरत होगी। भूमि, नौकरी और सुविधाओं के सिलसिले में स्थानीय लोगों को संरक्षण प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि जिन राज्यों में आईएलपी (इनर लाइन परमिट) लागू होती है उनमें अरूणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम के बाद मणिपुर चौथा राज्य है।
आईएलपी प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कुछ राज्यों में अन्य भारतीय नागरिकों को बसने से रोकना है, ताकि वहां के मूल निवासियों का संरक्षण किया जा सके।
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