देश की खबरें | सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘बिन्दास बोल’ के खिलाफ याचिका पर न्यायालय शुक्रवार को करेगा सुनवाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘बिन्दास बोल’ के खिलाफ दायर याचिका पर कल सुनवाई की जायेगी। इस कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की घुसपैठ की साजिश का बड़ा पर्दाफाश होगा।
नयी दिल्ली, 17 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘बिन्दास बोल’ के खिलाफ दायर याचिका पर कल सुनवाई की जायेगी। इस कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की घुसपैठ की साजिश का बड़ा पर्दाफाश होगा।
न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष जब यह मामला आया तो याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जार्ज चौधरी ने कहा कि उन्हें चैनल द्वारा आज ही दाखिल जवाब की प्रति दी गयी है और इसका जवाब देने के लिये उन्हें वक्त चाहिए।
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही 15 सितंबर को सुदर्शन टीवी के इस कार्यक्रम के प्रसारण पर अगले आदेश तक के लिये रोक लगाते हुये कहा था कि प्रसारित कड़ियों की मंशा पहली नजर में समुदाय को बदनाम करने की लगती है।
सुदर्शन टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि उन्होंने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है।
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दीवान ने कहा, ‘‘हमारे खिलाफ निषेध आदेश है’’ और ‘‘इतने समय में जवाब देना मुश्किल था।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘यह सोमवार को या कल लिया जा सकता है या मुझे आज ही शुरू करने दीजिये।’’
केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई की जा सकती है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘हम प्रधान न्यायाधीश से अनुरोध कर सकते हैं कि हमें कल बैठने दें।’’ उन्होंने कहा कि संभवत: ऐसा हो जायेगा। हम सवेरे 10.30 पर सुनवाई शुरू करके इसे पूरा कर सकते हैं।
सालिसीटर जनरल ने कहा, ‘‘अगर यह मामला सिर्फ सुदर्शन टीवी तक है तो हमें शायद बहुत कुछ नहीं कहना होगा लेकिन यदि व्यापक विषय है तो हम संबोधित करना चाहेंगे।’’
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि न्यायालय को अभी तक इसका कोई लिंक या कार्यक्रम की कड़ियां पेन ड्राइव में नहीं मिली हैं।
इस मामले में पेश एक वकील नेकहा कि वह कोर्टमास्टर के पास इन कड़ियों का लिंक भेज देगा।
दीवान ने न्यायालय के 15 सितंबर के आदेश से पहले प्रसारित चार कड़ियों का लिंक नहीं भेजने पर क्षमा याचना की और कहा कि वे यथाशीघ्र इसे न्यायालय के पास भेज देंगे।
जब चौधरी ने पीठ से कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक द्वारा किये गये ट्विट को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए तो न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘अगर उन्होंने (सुरेश चव्हाणके) ने कुछ बेवकूफी भरा कहाहै तो हम इसे नजरअंदाज करेंगे।’’
चौधरी ने कहा कि वह इसे सिर्फ न्यायालय के संज्ञान में लाना चाहते थे।
भारतीय प्रेस परिषद और नेशनल ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कहा कि वे भी इस मामले से जुड़े व्यापक मुद्दे पर न्यायालय को संबोधित करना चाहेंगे।
न्यायालय ने भारत को सभ्यताओं, संस्कृतियों,धर्मो और ओं वाला देश बताते हुये 15 सितंबर को कहा था कि किसी भी धार्मिक समुदाय को बदनाम करने के प्रयास को सांविधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में यह न्यायालय बहुत ही गंभीरता से लेगी और सांविधानिक मूल्यों को लागू कराना इस न्यायालय का कर्तव्य है।
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