देश की खबरें | रमानी के खिलाफ अकबर की मानहानि याचिका के स्थानांतरण पर 22 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी अदालत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को कहा कि अगर यह पाया जाता है कि पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मुकदमे की सुनवाई करने वाली मजिस्ट्रेट अदालत के पास अधिकार क्षेत्र नहीं है तो न सिर्फ अंतिम दलीलें बल्कि दो साल तक चली पूरी सुनवाई ‘निरर्थक’ हो जाएगी।

अदालत 22 अक्टूबर को आदेश सुनाएगी कि आपराधिक मानहानि की शिकायत अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) की अदालत से किसी अन्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित किया जाए या नहीं।

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मामले की सुनवाई कर रहे एसीएमएम ने मंगलवार को यह मामला प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश को भेज दिया था और मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने को कहा था क्योंकि वह अदालत कानून निर्माताओं के खिलाफ दायर मामलों की सुनवाई के लिए नामित की गयी है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता कोहली ने आदेश सुरक्षित रख लिया और कहा कि अधिसूचना संबंधित मजिस्ट्रेट को सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों के अलावा अन्य मामलों की सुनवाई से नहीं रोकती है।

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न्यायाधीश ने कहा, "अधिसूचना का मकसद यह है कि कानून निर्माताओं के खिलाफ मामलों में जल्दी फैसला हो।’’

उन्होंने हालांकि कहा कि यदि यह पाया जाता है कि मामले की सुनवाई करने वाली मजिस्ट्रेट अदालत के पास अधिकार क्षेत्र नहीं था तो न सिर्फ अंतिम दलीलें, बल्कि पूरी सुनवाई निरर्थक हो जाएगी।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इससे पहले किसी भी वकील ने इस बिंदु को नहीं उठाया...।’’

सुनवाई के दौरान अकबर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने कहा कि पूरी सुनवाई लगभग समाप्त हो गयी थी और केवल कुछ तारीखें शेष थीं।

उन्होंने कहा कि अगर मामले में और देरी हुयी तो काफी अहित होगा।

रमानी की ओर से पेश वकील ने हालांकि कहा कि अदालत द्वारा पारित किसी भी आदेश पर आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है।

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