नयी दिल्ली, आठ जून आम आदमी पार्टी (आप) सांसद राघव चड्ढा को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने राज्यसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि उनकी (चड्ढा की) अर्जी लंबित रहने तक और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें लुटियंस दिल्ली में ‘टाइप-7’ बंगले से बेदखल न किया जाए।
इस श्रेणी का आवास आमतौर पर ऐसे सांसदों को आवंटित किया जाता है जो पूर्व मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या राज्यपाल रह चुके होते हैं।
अदालत अब 10 जुलाई को इस बात पर फैसला करेगी कि बंगले का आवंटन रद्द करने के राज्यसभा सचिवालय के तीन मार्च 2023 के आदेश के खिलाफ चड्ढा की अर्जी सुनवाई योग्य है या नहीं।
न्यायिक आदेश और सांसद की याचिका पर टिप्पणी के लिए राज्यसभा सचिवालय की ओर से कोई भी तुरंत उपलब्ध नहीं हुआ।
कार्यवाही के दौरान, राज्यसभा सचिवालय के वकील ने अर्जी की पोषणीयता (सुनवाई योग्य है या नहीं) को लेकर आपत्ति जताई।
अपर जिला न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने एक जून को इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तिथि निर्धारित की थी।
अदालत ने अप्रैल में सचिवालय को निर्देश दिया था कि वह चड्ढा को आवेदन लंबित रहने तक ‘कानून की उचित प्रक्रिया के बिना’ बंगले से बेदखल न करे।
न्यायाधीश ने कहा था, “इस स्तर पर, मैं वादी की ओर से दी गई इस दलील पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझता हूं कि सचिवालय द्वारा एक बार किया गया आवंटन संसद सदस्य के पूरे कार्यकाल के दौरान किसी भी परिस्थिति में रद्द नहीं किया जा सकता है।’’
न्यायाधीश ने कहा कि वह इस दलील में दम पाते हैं कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को घर से बेदखल नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “चूंकि, वादी (चड्ढा) एक आवास में रह रहे हैं, जो सरकारी परिसर की श्रेणी में आता है और प्रतिवादी (राज्यसभा सचिवालय) कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य है।”
न्यायाधीश ने चड्ढा की इस दलील का संज्ञान लिया कि सचिवालय ‘जल्दबाजी’ में काम कर रहा है और इस बात की प्रबल संभावना है कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें बेदखल किया जा सकता है।
न्यायाधीश ने कहा, “इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया इस आशय का निर्देश जारी करने का मामला बनता है कि वादी को कानूनी प्रक्रिया के बिना बंगले से बेदखल नहीं किया जाए।”
उन्होंने कहा कि यह बात भी उनके पक्ष में जाती है कि वह बंगले में अपने माता-पिता के साथ रहते हैं।
न्यायाधीश ने कहा, “अगर वादी को कानूनी प्रक्रिया के बिना (बंगले से) बेदखल कर दिया जाता है तो उन्हें वास्तव में अपूरणीय क्षति होगी। लिहाज़ा प्रतिवादी को निर्देश दिया जाता है कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक वादी को बंगले से न निकाले... कानूनी प्रक्रिया के बिना।”
गौरतलब है कि चड्ढा को पिछले साल छह जुलाई को यहां पंडारा पार्क में ‘टाइप 6’ बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन उन्होंने 29 अगस्त को राज्यसभा के सभापति से ‘टाइप 7’ आवास का अनुरोध किया था।
उसके बाद उन्हें पंडारा रोड पर एक नया बंगला आवंटित किया गया था। हालांकि इस साल मार्च में वह आवंटन रद्द कर दिया गया था। चड्ढा ने इसी फैसले को चुनौती दी है।
आप सांसद ने मानसिक पीड़ा और प्रताड़ना के लिए सचिवालय से 5.5 लाख रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।
अप्रैल 2022 में जारी राज्यसभा सदस्यों की पुस्तिका के अनुसार, पहली बार सांसद बनने वाले चड्ढा सामान्य रूप से ‘टाइप -5’ आवास के हकदार होते।
पुस्तिका के मुताबिक, हालाकि, वह पूर्व विधायक भी हैं, जिन्होंने दिल्ली विधानसभा में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, इसलिए वह “टाइप-6” बंगले के हकदार हैं।
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