नयी दिल्ली, 21 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति में उपराज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा देरी किए जाने का आरोप लगाने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर उपराज्यपाल कार्यालय से शुक्रवार को जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने उपराज्यपाल कार्यालय को नोटिस जारी किया।
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सक्सेना यह कहते हुए मामले में देरी कर रहे हैं कि उन्हें यह पता लगाने के लिए कानूनी राय लेने की आवश्यकता है कि क्या नियुक्ति के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति आवश्यक है।
विद्युत कानून की धारा 84(2) का हवाला देते हुए सिंघवी ने कहा कि नियुक्त किए जाने वाले व्यक्ति के मूल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करना जरूरी होता है।
इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख तय की गयी है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 10 जनवरी को सक्सेना को पत्र लिखकर उनसे डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति को फौरन मंजूरी देने का अनुरोध किया था।
इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डीईआरसी के अगले अध्यक्ष के तौर पर न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) राजीव श्रीवास्तव की नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
सिसोदिया ने पत्र में कहा था कि डीईआरसी के निवर्तमान अध्यक्ष न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) शबीहुल हसनैन का कार्यकाल समाप्त हो गया है और अभी तक उपराज्यपाल ने नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY