नयी दिल्ली, 16 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रवासी एवं निर्माण कर्मियों के लिए 3,200 करोड़ रुपए की उपकर निधि में कथित अनियमितताओं के संबंध में सीबीआई जांच के लिये दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को केंद्र और आप सरकार से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने केंद्र, दिल्ली सरकार और भवन एवं अन्य निर्माण कर्मचारी कल्याण बोर्ड (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) को नोटिस जारी किये और उन्हें गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति संस्थान की याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया।
अदालत ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मामले की सुनवाई की। अदालत ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा को भी याचिका में एक पक्ष के रूप में शामिल किया और उससे भी जवाब मांगा है।
अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए दो जुलाई की तारीख तय की।
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वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने एनजीओ की पैरवी करते हुए कहा कि कुछ दस्तावेज दर्शाते हैं कि दिल्ली सरकार और कल्याण बोर्ड ने कथित भ्रष्टाचार किया और ऑटो चालकों, फैक्ट्री कर्मियों, दर्जियों जैसे गैर-निर्माण कर्मियों को धोखाधड़ी से लाभ देकर 3,200 करोड़ रुपए की दिल्ली भवन उपकर निधि का दुरुपयोग किया।
एनजीओ ने बताया कि दिल्ली उपकर निधि के तहत अब तक करीब 3,200 करोड़ रुपए एकत्र किए गए हैं। यह निधि विशेष रूप से पंजीकृत निर्माण कर्मियों को लाभ देने के लिए एकत्र की गई है।
याचिका में कहा गया कि लॉकडाउन के दौरान दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि सभी पंजीकृत निर्माण कर्मियों को 5,000 रुपए प्रति माह दिए जाएंगे, लेकिन जब संगठन के स्वयंसेवकों ने जांच की, तो कर्मियों ने बताया कि उन्हें सरकार से कोई राशि नहीं मिली।
इसमें आरोप लगाया है कि निर्माण कर्मियों के रूप में ऐसे लाखों लोगों का पंजीकरण किया गया है, जो निर्माण कर्मी नहीं है। इन फर्जी निर्माण कर्मियों में सुरक्षा गार्ड, ऑटो एवं टैक्सी चालक, फैक्ट्रियों एवं दुकानों पर काम करने वाले कर्मी, गृहिणियां, दर्जी एवं नाई आदि शामिल हैं।
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