नयी दिल्ली, पांच जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव अशोक अरोड़ा के निलबंन को चुनौती देने वाली याचिका पर एससीबीए और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से जवाब मांगा है।
एससीबीए की कार्यकारिणी समिति ने आठ मई को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हुई बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर अरोड़ा को सचिव पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
इसके एक दिन पहले ही अरोड़ा ने वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे को एससीबीए अध्यक्ष पद से हटाने के लिये एजेंडा पर चर्चा को लेकर वकीलों की संस्था की आकस्मिक आम सभा (ईजीएम) बुलाने की 11 मई को मांग की थी।
एससीबीए के एक अधिकारी के मुताबिक कार्यकारिणी समिति ने प्रस्तावित ईजीएम को भी रद्द कर दिया और अरोड़ा के खिलाफ लगाये गये आरोपों की जांच के लिये तीन सदस्यीय एक समिति गठित करने का फैसला किया।
अधिकारी ने बताया था कि अरोड़ा को निलंबित करने का फैसला बैठक में शामिल होने वाले वकीलों के बहुमत से लिया गया था।
न्यायामूर्ति अरूण मिश्रा द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन-2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई एक टिप्पणी पर चिंता प्रकट करने वाले ‘‘संकल्प’’ पर वकीलों की संस्था द्वारा अपनाये गये रुख को लेकर एससीबीए में शीर्ष पदाधिकारियों के बीच मतभेद पैदा नजर आये थे।
उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी को न्यायमूर्ति मिश्रा ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसनीय दूरदृष्टा और बहुमुखी प्रतिभा वाला ऐसा नेता बताया था,जिनकी सोच वैश्विक स्तर की है, लेकिन स्थानीय हितों को भी अनदेखा नहीं करते।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर तीन जुलाई को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई की। उन्होंने अरोड़ा की याचिका पर इस वाद में समन एवं नोटिस जारी किये हैं।
अरोड़ा ने याचिका के जरिये यह मांग की है कि उन्हें निलंबित करने वाले एससीबीए की कार्यकारिणी समिति द्वारा जारी प्रस्ताव पर स्थगन आदेश जारी किया जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि लिखित बयान और याचिका पर जवाब एससीबीए तथा बीसीआई द्वारा तीन हफ्तों के अंदर दाखिल किया जाए।
साथ ही, इस विषय की अगली सुनवाई छह अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दी गई।
मामले में एससीबीए का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर और अरविंद निगम कर रहे हैं, जबकि बीसीआई का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता राजदीप बेहुरा कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय में मामले में अरोड़ा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश टिकू कर रहे हैं।
अरोड़ा ने अपने वाद में एससीबीए के प्रस्ताव को अमान्य और एससीबीए के नियमों के खिलाफ घोषित करने की मांग की है। साथ ही ,इसे अवैध घोषित करते हुए रद्द करने की भी मांग की है।
वाद में अरोड़ा के पक्ष में और एससीबीए के खिलाफ एक आदेश जारी करते हुए उसे और उसके पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों को एससीबीए के निर्वाचित सचिव के रूप में शेष कार्यकाल के लिये अरोड़ा की ड्यूटी में हस्तक्षेप करने से रोकने की भी मांग की गई है।
वाद में तीन न्यायाधीशों की समिति को भी अवैध एवं अमान्य घोषित करने की मांग की गई हे।
वाद में बीसीआई को यह सुनिश्चित करने के लिये निर्देश देने की भी मांग की गई है कि 10 मई के उसके संकल्प को समुचित रूप से एससीबीए द्वारा लागू किया जाए।
बीसीआई ने 10 मई को अरोड़ा के निलंबन संबंधी एससीबीआई की कार्यकारिणी समिति के आठ मई के फैसले पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि यह अवैध, अलोकतांत्रिक और निरंकुश कदम है।
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