देश की खबरें | न्यायालय ने राज्यों से प्रवासी कामगारों के रिकार्ड का विवरण मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान अपने घर पहुंचने वाले कामगारों का रिकार्ड और इसे रखने के तरीके का विवरण तीन सप्ताह के भीतर पेश करें।
नयी दिल्ली, 31 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान अपने घर पहुंचने वाले कामगारों का रिकार्ड और इसे रखने के तरीके का विवरण तीन सप्ताह के भीतर पेश करें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि रास्ते में फंसे हुये सभी कामगारों को 15 दिन के भीतर ट्रेन या दूसरे साधनों से पहुंचाने के बारे में उसके नौ जून के आदेश के बावजूद अभी भी महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कामगार फंसे हुये हैं।
न्यायालय ने कहा कि एक भी राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश ने शीर्ष अदालत के पिछले महीने आदेश के अनुपालन में हलफनामे पर विवरण पेश नहीं किया है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘राज्यों को कामगारों के अपने पैतृक स्थानों पर पहुंचने के बारे में रखे गये रिकार्ड और उनके कौशल तथा रोजगार से संबंधित अन्य विवरण पेश करना है। राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश तीन सप्ताह के भीतर इस विवरण के साथ हलफनामे दाखिल करें।’’
यह भी पढ़े | उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, रक्षाबंधन और बकरीद पर इन जगहों पर नहीं होगा लॉकडाउन.
पीठ ने कहा कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नौ जून के आदेश पर अनुपालन के बारे में पूर्ण विवरण भी देना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने नौ जून के आदेश में कामगारों के बारे में अनेक निर्देश दिये थे। न्यायालय ने केन्द्र और राज्य सरकारों से कहा था कि अपने घर जाने के इच्छुक श्रमिकों की पहचान कर 15 दिन के भीतर उन्हें ट्रेन और यातायात के दूसरे साधनों से उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाये।
शीर्ष अदालत ने इन कामगारों की दयनीय स्थिति और समस्याओं का संज्ञान लेते हुये पिछले महीने प्राधिकारियों से कहा था कि सामाजिक दूरी के मानदंडों का उल्लंघन करने वाले कामगारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने पर विचार किया जाये।
न्यायालय ने शुक्रवार को अपने 12 पेज के आदेश में महाराष्ट्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे का जिक्र किया और कहा कि इससे संकेत मिलता है कि राज्य में अभी भी कुछ कामगार अपने पैतृक स्थान लौटने के इंतजार में है।
न्यायालय ने कहा कि हमारा मानना है कि महाराष्ट्र सरकार को उन कामगारों को वापस भेजने के लिये जल्द से जल्द उचित कदम उठाने चाहिए जो अभी भी अपने पैतृक स्थान लौटना चाहते हैं।
न्यायालय ने इस मामले को अब चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया है।
इसी बीच, पीठ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के लिये राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना के मसले पर पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ विचार किया जायेगा जिसमें सुनवाई पूरी हो चुकी है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2020 08:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

