देश की खबरें | पीएमएलए में सीए को शामिल करने के खिलाफ याचिका पर अदालत ने केंद्र का रुख जानना चाहा

नयी दिल्ली, 21 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने धनशोधन निवारण कानून के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), कंपनी सचिव और कॉस्ट अकाउंटेंट को ‘रिपोर्टिंग संस्थाओं’ के दायरे में शामिल करने संबंधी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार का रुख जानना चाहा।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा को पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) रजत मोहन की याचिका पर निर्देश लेने के लिए समय दिया।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार अक्टूबर की तारीख निर्धारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उक्त पेशेवरों पर लागू किए गए दायित्वों से संबंधित कुछ प्रावधानों की वैधता को इस स्तर पर चुनौती नहीं दे रहा है।

पीठ ने कहा कि सीए लेखांकन के क्षेत्र में ‘विशेषज्ञ’ हैं और निगरानी की यह व्यवस्था केवल ‘निर्दिष्ट लेन-देन’ के संबंध में की गई है। उसने याचिकाकर्ता को नयी व्यवस्था में मौजूद ‘समस्या’ को रेखांकित करने का निर्देश दिया। इस पीठ में न्यायमूर्ति संजीव नरूला भी शामिल थे।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने दलील दी कि यह समावेशन ‘पेशेवरों को अस्पष्ट और व्यक्तिपरक आधार पर पुलिस में तब्दील कर रहा है’, जो ग्राहकों के साथ साझा किए जाने वाले उनके भरोसेमंद रिश्ते का भी उल्लंघन है।

पाइस ने रेखांकित किया कि ग्राहक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला न होने की सूरत में भी सीए पर भारी दायित्व डाला गया है। उन्होंने कहा, “मुझ पर पीएमएलए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है... आप अपने ही ग्राहक की जांच कर रहे हैं।”

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शर्मा ने याचिका पर नोटिस नहीं जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “कोई भी हस्तक्षेप लेन-देन की जानकारी देने के उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है।”

शर्मा ने कहा, “हम बस यही चाहते हैं कि वे (मामले दर मामले के आधार पर) हमारी आंख और कान बनें।” उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक प्रक्रिया स्थापित की जाएगी और याचिकाकर्ता की पीएमएलए के तहत किए गए कानूनी प्रावधानों को रद्द करने की अर्जी ‘ठुकराई जानी होगी।’

शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि राष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्राधिकरण का भी गठन किया गया है।

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