देश की खबरें | न्यायाधिकरणों को ई-अदालत परियोजना के अंतर्गत लाने से न्यायालय का इनकार

नयी दिल्ली, 24 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधिकरणों को ई-अदालत योजना के अंतर्गत लाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

ई- अदालत योजना का लक्ष्य पूरे देश की अदालतों में डिजिटल अवसंरचना का उन्नयन करना है।

इस संबंध में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया था कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण और राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसी अर्ध न्यायिक समितियों को राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

एनजेडीजी ई-अदालत परियोजना के अंतर्गत आता है जो देश की न्यायपालिका के कम्प्यूटरीकरण पर राष्ट्रीय नीति तैयार करने से संबंधित है। इसकी निगरानी और वित्तपोषण विधि मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा किया जाता है।

एनजेडीजी पोर्टल देश भर की अदालतों द्वारा शुरू किए गए। यह लंबित और निपटाए गए मामलों से संबंधित डेटा का राष्ट्रीय कोष है।

प्रधान न्यायधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘ आप न्याय विभाग से संपर्क कर सकते हैं। एनजेडीसी ई-अदालत योजना का हिस्सा है। यह जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय को देखता है और यह न्यायाधिकरणों को बिल्कुल नहीं देखता।’’

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह परियोजना की रूपरेखा में ‘अतिक्रमण’ नहीं कर सकती।

पीठ ने कहा, ‘‘सात हजार करोड़ रुपये अदालतों के लिए आवंटित किए गए हैं न कि न्यायाधिकरणों के लिए। जिस क्षण हम कहते हैं कि न्यायाधिकरणों को भी इसके अंतर्गत लाया जाएगा तो कोष उन न्यायाधिकरणों पर भी खर्च होगा।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ मौजूदा समय में ई-अदालत योजना के अंतर्गत न्यायाधिकरणों के लिए प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए न्यायाधिकरणों को फिलहाल इसके अंतर्गत नहीं लाया जा सकता।’’

आदेश में कहा गया, ‘‘ न्यायाधिकरणों को एनजेडीजी के अंतर्गत लाने की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती क्योंकि यह ई-अदालत परियोजना के अंतर्गत है। याचिकाकर्ता कानून के तहत अन्य उपायों का इस्तेमाल कर सकता है और इस संबंध में सरकार से भी संपर्क कर सकता है।’’

पीठ ने हालांकि, जनहित याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार से संपर्क कर न्यायाधिकरणों के कंप्यूटरीकरण की मांग करने की अनुमति दे दी।

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