नयी दिल्ली, 19 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान सरकार को राहत देते हुए उच्च न्यायालय के कई आदेशों को रद्द कर दिया है, जिसमें अवैध रूप से खनन किए गए खनिजों और स्टोन चिप्स की ढुलाई के लिए जब्त किए गए वाहनों को छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी की दलीलों पर गौर किया कि जब्त किए गए वाहनों को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा सामान्य मामलों की तरह छोड़ने का आदेश दिया गया था, जैसा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत मामलों में किया जाता है।
सिंघवी ने कहा कि राजस्थान गौण खनिज रियायत (आरएमएमसी) नियमावली, 2017 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार, खनिजों की अवैध ढुलाई में शामिल वाहनों के मालिकों को अन्य मामलों में जब्त किए गए वाहनों की तुलना में भारी जुर्माना राशि का भुगतान करना पड़ता है।
अधिवक्ता ने कहा कि आरएमएमसी के नियमों और एनजीटी के आदेशों के कारण जुर्माना राशि बढ़ गई क्योंकि वे राज्य में खनिजों के अवैध खनन पर नियंत्रण लगाने के लिए हैं।
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, ‘‘हमने उच्च न्यायालय के आदेशों को रद्द कर दिया है और प्रावधान किया है कि शिकायत नियम (2017) के तहत होने की स्थिति में वाहन तब छोड़े जाएंगे, जब वाहन मालिक आवश्यक राशि जमा कर देंगे।’’
राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रत्येक वाहन को एक-एक लाख रुपये सुरक्षा राशि जमा करने पर छोड़ने का निर्देश दिया था और वाहन मालिकों के पालन के लिए कुछ अन्य शर्तें भी लगाई थीं।
राज्य सरकार ने आदेशों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में अपील दायर की और दावा किया कि उच्च न्यायालय ने ‘‘वाहनों को छोड़ने का निर्देश देने में त्रुटि की है, जो न केवल वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि आरएमएमसी नियमावली, 2017 के नियम 54 और 60 के तहत जब्त किए गए वाहनों को छोड़ने के संबंध में एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप भी नहीं है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY