अदालत ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण के नोटिसों पर रोक लगायी
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नयी दिल्ली, 23 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए दो नए सार्वजनिक नोटिसों के संचालन पर फिर से रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने वकीलों और वादियों को एक जून तक का समय दिया है ताकि वे इन मामलों में दस्तावेजीकरण पूरा कर सकें।

उच्च न्यायालय ने 11 मई को पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क महा नियंत्रक (सीजीपीडीटीएम) के चार मई के सार्वजनिक नोटिस पर रोक लगा दी थी और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वकीलों और वादियों को 18 मई तक का समय दिया था।

अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 23 मार्च को निर्देश दिया था कि 15 मार्च से अगले आदेश तक सभी मामलों में सीमा अवधि बढ़ाई जाएगी।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने 21 मई के अपने आदेश में सीजीपीडीएम की 18 मई और 20 मई की अधिसूचनाओं पर रोक लगाते हुए प्राधिकरण से सवाल किया कि उच्चतम अदालत के 23 मार्च के निर्देश और उच्च न्यायालय के 11 मई के फैसले की पृष्ठभूमि में दो सार्वजनिक नोटिस जारी करने की कैसे आवश्यकता हुयी।

उच्च न्यायालय ने सीजीपीडीटीएम को नोटिस जारी कर 17 जून तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, "इस बीच, इस अदालत के अगले आदेश तक 18 मई और 20 मई के सार्वजनिक नोटिसों के संचालन पर रोक लगायी जाती है।"

यह आदेश दोनों नोटिसों को चुनौती देने वाली बौद्धिक संपदा अटॉर्नी एसोसिएशन (आईपीएए) की याचिका पर आया है जिसका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर लाल और अधिवक्ता अर्चना सहदेव ने किया।

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