नयी दिल्ली, तीन जनवरी उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले के आरोपी हनी बाबू की जमानत याचिका खारिज करने वाले बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उनकी अर्जी पर बुधवार को महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) का जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने बाबू की याचिका पर राज्य सरकार और एनआईए को नोटिस जारी किया और तीन सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा।
उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर, 2022 को बाबू की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
मामले में जांच कर रही एनआईए ने बाबू पर प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के नेताओं के निर्देश पर माओवादी गतिविधियों और विचारधारा को बढ़ावा देने में सह-साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया है।
इस मामले में बाबू को जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था और इस समय वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं।
मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। पुलिस ने दावा किया था कि इसके कारण अगले दिन शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।
हिंसा में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे।
बाबू ने अपनी याचिका में कहा था कि विशेष अदालत ने यह कहने में ‘गलती की’ है कि उनके खिलाफ प्रथमदृष्टया अभियोजन योग्य सामग्री है।
एनआईए ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दलील दी कि बाबू नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में सक्रियता से शामिल थे और वह सरकार को अस्थिर करना चाहते थे।
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