उत्तराखंड में मुस्लिम दुकानदार को बचाने वाले दीपक के खिलाफ हुई एफआईआर
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार को बचाने आए युवक दीपक के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. उनके खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. वहीं, दीपक का कहना है कि वे नफरत के आगे नहीं झुकेंगे.उत्तराखंड में पौड़ी जिले के कोटद्वार कस्बे में एक मुस्लिम व्यक्ति की कपड़े की दुकान के नाम पर हिन्दू संगठन के कुछ युवकों ने आपत्ति जताई, नाम बदलने का दबाव बनाया लेकिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आए स्थानीय लोगों ने जब इसका विरोध किया तो इस मामले ने तूल पकड़ लिया.

घटना की शुरुआत 26 जनवरी को होती है, जब पूरा देश संविधान लागू होने का उत्सव यानी गणतंत्र दिवस मना रहा था. कोटद्वार कस्बे में पिछले तीस साल से ‘बाबा स्कूल ड्रेस' नाम से कपड़ों की दुकान चलाने वाले वकील अहमद की दुकान पर बजरंग दल के कुछ लोग आए और 75 वर्षीय वकील अहमद से दुकान के नाम से ‘बाबा' शब्द हटाने का दबाव बनाने लगे.

कोटद्वार कस्बे में ही एक जिम चलाने वाले दीपक कुमार कश्यप वकील अहमद के समर्थन में खड़े हो गए. उस वक्त तो पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाल लिया लेकिन 31 जनवरी को हालात तब बिगड़ गए जब दीपक के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया.

क्या था पूरा मामला?

पौड़ी जिले के एसएसपी सर्वेश पंवार ने घटना के बारे में डीडब्ल्यू को बताया, "कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर 26 जनवरी को कुछ विवाद हुआ था. उसके बाद शनिवार को कुछ लोग देहरादून से आए थे. उस दिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में जिस युवक ने विरोध जताया था, उसके विरोध में ये लोग पहुंचे थे. पुलिस ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए देहरादून से आए कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. क्योंकि इन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी. इसके अलावा 'बाबा गारमेंट्स' के दुकानदार की शिकायत पर भी एक मुकदमा दर्ज किया गया है.”

कहां से आई उर्दू भाषा और भारत के लोगों में कैसे रच-बस गई?

लेकिन रविवार को पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर वकील अहमद का बचाव करने वाले जिम संचालक दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की. लेकिन दीपक कुमार और उनके साथी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का काफी विरोध हो रहा है. 'उत्तराखंड इंसानियत मंच' और कुछ अन्य सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया और इस बारे में उत्तराखंड के डीआइजी (लॉ एंड ऑर्डर) धीरेंद्र गुंज्याल से मुलाकात कर मुकदमा वापसी की मांग की.

मंच के संयोजक डॉक्टर रवि चोपड़ा ने मीडिया को बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमा पूरी तरह से झूठा है. उनका कहना था, "इसे वापस लिया जाना चाहिए. दीपक ने जो काम किया, वह भाईचारे को बढ़ाता है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है. उसके खिलाफ मुकदमा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

दरअसल, इस मामले में घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वकील अहमद को बचाते हुए जब दीपक कुमार से बजरंग दल के लोगों ने पूछा कि तुम कौन हो? इस पर दीपक कुमार ने जवाब दिया- "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.”

राहुल गांधी ने किया समर्थन

वायरल वीडियो में दीपक और उनके साथी वकील अहमद के बचाव में ये कहते हुए सुने जा सकते हैं कि ‘इनकी दुकान तीस साल से यहां है और दुकान का यही नाम है. आपके कहने से क्या नाम बदल देंगे?'

दरअसल, बजरंग दल के सदस्यों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी दुकान का नाम 'बाबा स्कूल ड्रेस' क्यों रखा है? उन्हें इस नाम से इसलिए आपत्ति थी क्योंकि यह नाम कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सिद्धबली बाबा के नाम से मिलता-जुलता है और यह भ्रम पैदा कर सकता है.

यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर दीपक कुमार की तारीफ करते हुए लिखा, "उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं. दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं, उस संविधान के लिए जिसे बीजेपी और संघ परिवार रोज रौंदने की साजिश कर रहे हैं. वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं. ”

पुलिस पर क्या लगे आरोप

पुलिस और प्रशासन स्थिति को संभालने का दावा भले ही कर रहे हैं लेकिन दीपक कुमार ने प्रशासन पर एकतरफा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दीपक कुमार कहते हैं, "मेरे जिम में शनिवार को सौ से ज्यादा लोग पहुंचकर हंगामा करने लगे. प्रदर्शनकारी कई गाड़ियों में हथियार लेकर पहुंचे हुए थे. पुलिस ने मुझे तो वहां से हटा दिया लेकिन बजरंग दल के लोग वहां घंटों हंगामा करते रहे.”

उधर एक फरवरी यानी रविवार को पुलिस ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाला. लेकिन दीपक कुमार का कहना है कि उन्हें अभी भी धमकियां मिल रही हैं. एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "देश को प्यार की जरूरत है, नफरत की नहीं. आप जितनी चाहें नफरत फैला लें, लेकिन प्यार बांटना बहुत बड़ी बात है.”

मुसाफिरों ने कैसे बदली हमारी दुनिया

इस बीच, घटना के बाद से ही दीपक का जिम भी बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. डीडब्ल्यू से बातचीत में दीपक कुमार का कहना था, "जिम कई दिनों से बंद है. जिम किराए की जगह पर है जिसका हर महीने करीब 50 हजार रुपये किराया जाता है. तीन-चार दिन में ही बड़ा नुकसान हो गया है. घर वाले भी बहुत परेशान हैं. समझ में नहीं आता कि किसी की मदद करके, इंसानियत की बात करके हमने क्या गुनाह कर दिया है. लेकिन कुछ भी हो जाए, मैं नफरत के आगे नहीं झुकूंगा.”

स्थानीय लोग कर रहे समर्थन

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम घटना के बाद कोटद्वार पहुंचे थे. सोमवार को उन्होंने तमाम लोगों से बातचीत की. डीडब्ल्यू से बातचीत में अजीत अंजुम बताते हैं कि फिलहाल तो हालात सामान्य हैं और पुलिस ने सख्ती भी कर रखी है लेकिन जिस तरह से उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, वो बहुत गंभीर हैं.

अजीत अंजुम कहते हैं, "अच्छी बात यह है कि कोटद्वार में आम लोग दीपक के समर्थन में हैं और दीपक जैसे लोगों की तारीफ कर रहे हैं. हंगामा करने वाले लोग बाहर से आए थे- देहरादून, हरिद्वार इत्यादि जगहों से. उन्हीं लोगों ने दीपक के खिलाफ एफआईआर भी कराई है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तो नाइंसाफी हुई. चूंकि स्थानीय लोगों में से ज्यादातर कारोबारी लोग हैं, खुलकर बोलने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बजरंग दल के लोग कहीं फिर सैकड़ों की संख्या में आकर हंगामा न करें. लेकिन ऐसी सांप्रदायिक घटना का समर्थन तो कतई नहीं करते.”

उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाएं काफी बढ़ी हैं. दो महीने पहले पूर्वोत्तर के एक छात्र की हत्या हो गई थी और उसके बाद देहरादून के विकास नगर में कश्मीरी युवक पर जानलेवा हमला हुआ था.