औरंगाबाद, 18 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जलगांव के जिलाधिकारी के उस आदेश पर दो सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें एक संगठन की शिकायत पर लोगों को एक मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका गया था।
संगठन ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि यह ढांचा ‘एक मंदिर का लगता है’।
उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ की न्यायमूर्ति आर एम जोशी की एकल पीठ ने याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद निर्धारित की।
जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि तब तक जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगाई जाती है।
पांडववाड़ा संघर्ष समिति नामक संगठन ने दावा किया था कि मस्जिद का ढांचा एक मंदिर जैसा लगता है और मुसलमानों ने इसमें अतिक्रमण किया है।
हालांकि, मस्जिद का रखरखाव करने वाली ट्रस्ट समिति ने कम से कम 1861 से संरचना के अस्तित्व में होने को दिखाने के लिए रिकॉर्ड रखने का दावा किया है।
समिति ने 11 जुलाई, 2023 को पारित जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती देने के लिए उसके अध्यक्ष अल्ताफ खान के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
ट्रस्ट ने दावा किया कि मस्जिद की चाबियां एरंडोल नगर पालिका परिषद के मुख्य अधिकारी को सौंपने का जिलाधिकारी का आदेश ‘मनमाना और अवैध’ था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY