उन्हें जमानत दो जून को दी गयी । अदालत ने हालांकि सख्त शर्तो के साथ जमानत दी है, जिनमें बिना अदालत की अनुमति के देश छोडकर नहीं जाना तथा निचली अदालत में अगली सुनवायी के लिए उपस्थित रहना शामिल है ।
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने आरोपियों को पचास-पचास हजार रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है।
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आरोपी किर्गिस्तान के हैं । उन्हें पुराने लखनऊ से 26 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था । उन पर भारतीय दंड संहिता, महामारी कानून 1897, पासपोर्ट कानून, विदेशी कानून तथा आपदा प्रबंधन कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था ।
विदेशी नागरिकों की ओर से अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने कहा कि उनके मुवक्किल वैध वीजा पर भारत आये थे जो अभी भी चल रहा है । उन्होंने दिल्ली में संबद्ध अधिकारियों को अपने लखनऊ जाने की जानकारी दी थी । उन्होंने 14 दिन के पृथकवास की अवधि पूरी कर ली है और तीन बार के परीक्षण में नेगेटिव पाये गये ।
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जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी पर्यटक वीजा पर आये थे लेकिन वे नयी दिल्ली के निजामुददीन में धार्मिक सम्मेलन में शामिल हुए और उसके बाद लखनऊ आ गये । बिना चिकित्सकीय परीक्षण कराये वे मरकज मस्जिद में रह रहे थे, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया ।
अदालत ने विभिन्न तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सशर्त जमानत मंजूर कर ली ।
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