देश की खबरें | अस्थाना से संबंधित याचिका का न्यायालय ने निस्तारण किया, कानूनी मुद्दे को खुला रखा

नयी दिल्ली, 16 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की दिल्ली पुलिस आयुक्त के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की याचिका का सोमवार को निस्तारण कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने हालांकि, कानूनी मुद्दे को खुला रखा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस कानूनी मुद्दे से निपटेगी कि क्या राज्यों में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित करने वाला उसका फैसला दिल्ली पुलिस आयुक्त पर भी लागू होगा।

वर्ष 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के रूप में सेवारत थे। उन्हें सेवानिवृत्त होने से चार दिन पहले 27 जुलाई, 2021 को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया था। उन्हें एक साल के लिए गुजरात कैडर से केंद्रशासित प्रदेश कैडर में स्थानांतरित किया गया था।

अपने हलफनामे में, केंद्र ने कहा था कि एनजीओ की याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और स्पष्ट रूप से तत्कालीन पुलिस आयुक्त के खिलाफ कुछ व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में, अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि उनके चयन में "कोई अनियमितता, अवैधता" नहीं थी।

इसने एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि अस्थाना की नियुक्ति के लिए केंद्र द्वारा दिए गए औचित्य और कारण "तर्कसंगत हैं तथा हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है"।

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