देश की खबरें | अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों के खिलाफ वादियों के शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति की निंदा की

मुंबई, 19 अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने वादियों द्वारा बचाव पक्ष के वकीलों के खिलाफ कदाचार की शिकायत दर्ज कराने या ऐसा करने की धमकी देने की हालिया प्रवृत्ति के प्रति नाराजगी जतायी।

अदालत ने नौ अगस्त को पारित एक आदेश में कहा कि ऐसी शिकायतों का वकीलों के जीवन और करियर पर जो प्रभाव होता है और वे जिस मानसिक प्रताड़ना से गुजरते हैं, उसे बयां नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंड पीठ अधिवक्ता गीता शास्त्री द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। शास्त्री ने अपनी याचिका में जालसाजी और अदालत में झूठी गवाही देने की वादी की शिकायत पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के आदेश को चुनौती दी है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसी शिकायत हाल के दिनों में नयी प्रवृत्ति बन गयी है।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘हम यह गौर करने के लिए बाध्य हैं कि दुर्भाग्य से यह अब इस अदालत में एक फैशन बन गया है, जहां वादी नियमित रूप से विरोधी पक्ष के अधिवक्ताओं के खिलाफ बार काउंसिल में शिकायत दाखिल कर रहे हैं। यह एक ऐसी प्रथा है, जिसकी हर परिस्थिति में निंदा की जानी चाहिए।’’

न्यायाधीशों ने कहा कि बचाव पक्ष के वकीलों का भी अपने मुवक्किल और अदालत के प्रति कर्तव्य है, जैसा कि सभी वकील करते हैं।

अदालत ने कहा, ‘विरोधी पक्ष के वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक शिकायतों की धमकी का इस्तेमाल वास्तव में कई मामलों में बचाव पक्ष के वकील को डराने और धमकाने तथा प्रतिवादी को पर्याप्त या उचित कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिले, इसे सुनिश्चित करने में किया जा रहा है।’’

न्यायाधीशों ने कहा कि अदालत ने ऐसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला देखा है, जिसमें एक बेहद युवा वकील के साथ ऐसा किया गया।

अदालत ने कहा, ‘‘वादी द्वारा ऐसी शिकायत के कारण उस युवा वकील का पूरा जीवन और करियर बर्बाद हो गया होता।’’

पीठ ने कहा कि न्यायाधीश सिर्फ विवादों का निपटारा नहीं कर रहे हैं। उसने कहा कि ‘‘हम बार के मानदंडों को लेकर भी उतने ही चिंतित हैं और हमें इस बात की भी चिंता है कि वकीलों के हितों के साथ भी समझौता नहीं होना चाहिए।’’

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