नयी दिल्ली, 26 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को पुलिस को निर्देश दिया कि फरवरी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान उत्तर पूर्व दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले की केस डायरी अदालत में रखी जाए। हिंसा के इस मामले में पिंजरा तोड़ समूह की एक सदस्य कथित रूप से शामिल थी।
पिंजरा तोड़ सदस्य नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर कार्यवाही संचालित कर रहे न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने दिल्ली पुलिस को 29 अगस्त को एक सीलबंद लिफाफे में केस डायरी जमा करने की अनुमति दे दी और सुनवाई 31 अगस्त तक स्थगित कर दी।
दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि केस डायरी में संवेदनशील जानकारी है जिसे इस स्तर पर नरवाल के वकील के साथ साझा नहीं किया जा सकता।
इस पर न्यायाधीश ने कहा कि एजेंसी के वकील और जांच अधिकारी को एक अलग वेब लिंक दिया जाएगा और वे संबंधित हिस्सा अदालत को दिखा सकते हैं।
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न्यायाधीश ने कहा कि नरवाल के वकील समेत अन्य लोगों को इस कार्यवाही की जानकारी नहीं रहेगी।
नरवाल की ओर से वकील अदित एस पुजारी ने इस पर विरोध नहीं जताया।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल की जमानत अर्जी को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।
नरवाल और समूह की एक अन्य सदस्य देवांगना कालिता को मामले में इस साल मई में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था।
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