नयी दिल्ली, 18 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वह छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में ‘‘संयम बनाए रखे।’’
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने छत्तीसगढ़ के दो व्यक्तियों द्वारा दायर की गई एक याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। दोनों व्यक्तियों ने याचिका में ईडी द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी है।
पीठ ने कहा, ‘‘कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। इसके अलावा, संबंधित प्रतिवादी अधिकारियों (ईडी) को हर तरह संयम बनाए रखना होगा।’’
शीर्ष अदालत ने 16 मई को मामले की सुनवाई करते हुए ईडी से कहा था कि वह ‘‘डर का माहौल’’ पैदा न करे। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ‘‘अनियमित तरीके से काम कर रही है’’ और राज्य में शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फंसाने की कोशिश कर रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि जांच एजेंसी द्वारा राज्य के अधिकारियों को परेशान किया जा रहा है और उनसे उनकी संपत्तियों का विवरण देने के लिए कहा जा रहा है, जिन्हें कुर्क किया जा रहा है।
पीठ ने कहा कि एक याचिका पर उसने पूर्व में निर्देश दिया था कि सुनवाई की अगली तारीख 18 जुलाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अदालत को ईडी द्वारा की जा रही जांच पर रोक लगा देनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘बिना किसी अपराध के वे जांच कैसे कर सकते हैं।’’
पीठ ने ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से मौखिक टिप्पणी में कहा, ‘‘तब तक संयम बनाए रखें...हम अंतिम विचार नहीं रख रहे हैं।’’
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व में शीर्ष अदालत में आरोप लगाया था कि राज्य के आबकारी विभाग के कई अधिकारियों ने शिकायत की है कि ईडी उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तारी की धमकी दे रहा है।
राज्य ने एक याचिका में पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए एक अर्जी दायर की है, जिसमें दावा किया गया है कि आबकारी विभाग के 52 अधिकारियों ने जांच के दौरान ईडी अधिकारियों द्वारा ‘‘मानसिक और शारीरिक यातना’’ का आरोप लगाते हुए लिखित रूप से शिकायत की है।
ईडी ने पूर्व में एक अदालत को छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार में राज्य सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और नेताओं के एक गिरोह द्वारा किए गए कथित बड़े घोटाले के बारे में बताया था, जिसने 2019-22 में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन कमाया था।
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