देश की खबरें | छेड़छाड़ मामले में प्राथमिकी रद्द करने पर सहमत अदालत, आरोपी के पिता से शिक्षकों की मुफ्त जांच कराने को कहा

नयी दिल्ली, 25 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय छेड़छाड़ और पीछा करने के एक आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने पर सहमत हो गया, हालांकि उसके पिता को 10 सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आर्थोपेडिक चिकित्सकों द्वारा मुफ्त चिकित्सा जांच उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

अदालत ने प्राथमिकी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि महिला और पुरुष ने स्वेच्छा से विवाद सुलझा लिया है तथा वह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत शील भंग करने, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के कथित अपराधों के लिए आपराधिक मुकदमा जारी नहीं रखना चाहती है।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि अदालत इस बात को ध्यान में रखती है कि यदि उस व्यक्ति को दोषी ठहराया गया, तो उसके खिलाफ आरोपों में गंभीर दंड शामिल है।

अदालत ने कहा कि यह व्यर्थ है, क्योंकि याचिकाकर्ता को दोषी ठहराए जाने की संभावना बहुत कम है।

उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करने की याचिका इस शर्त पर स्वीकार कर ली कि आरोपी व्यक्ति का पिता 10 सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को मुफ्त चिकित्सा स्वास्थ्य जांच प्रदान करने के लिए आर्थोपेडिक सर्जन या चिकित्सकों की व्यवस्था करेगा।

ये 10 स्कूल बिंदापुर, द्वारका, पालम और सागरपुर में हैं। चिकित्सा जांच अक्टूबर के किसी भी सप्ताह में कम से कम दो कार्य दिवसों पर की जानी है।

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